सिद्धार्थनगर। किताबों के बिना ज्ञान अधूरा है। बिना किताबों की पढ़ाई संभव भी नहीं है। ऐसे में गांव की प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रतियोगी किताबें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्लॉक स्तर पर पुस्तकालय खोलने की शुरूआत हुई। उसका ब्लॉक में 2015 में किसी तरह पुस्तकालय खुला भी। लेकिन इसकी किताबें उसका बीआरसी और राजकीय पुस्तकालय पर रखी गईं। इसके बाद उम्मीद जगी कि हर ब्लॉक में पुस्तकालय खोले जाएंगे। लेकिन उम्मीदें परवान नहीं चढ़ सकीं। वजह प्रशासन पुस्तकालय खोलने के लिए जमीन नहीं उपलब्ध करा सका।
गांवों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार की ओर से जिला व ब्लॉक स्तर पर राजकीय पुस्तकालय खोलने की कवायद शुरू हुई थी। पुस्तकालयों में आईएएस, आईपीएस, सेना भर्ती, पुलिस भर्ती, शिक्षक सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें रखे जाने की योजना थी। वर्ष 2013 में जिला मुख्यालय पर डीआईओएस ऑफिस के पास राजकीय पुस्तकालय खुला भी। इसी क्रम में उसका ब्लॉक में भी 2015 में राजकीय मिनी पुस्तकालय खुला। वहां के लिए भी किताबें आवंटित हुईं, लेकिन अपना भवन न होने के कारण वे किताबें बीआरसी सहित राजकीय पुस्तकालय में रखी गईं। जबकि अन्य ब्लॉकों में मिनी पुस्तकालय नहीं बन सके।
डीआईओएस डॉ. राजबहादुर मौर्य ने बताया जिला पुस्तकालय तो चल रहा है। रही बात ब्लॉक स्तर पर पुस्तकालय खोले जाने की तो यह मेरे समय की योजना नहीं है। उसका ब्लॉक में पुस्तकालय आवंटित है, वह भी चल रहा है।
250 अभ्यर्थियों ने कराया है पंजीकरण
जिला पुस्तकालय में पिछले पांच वर्षों में 250 अभ्यर्थियों ने पुस्तकालय में पढ़ने के लिए अपना पंजीकरण करवाया है। विभागीय जिम्मेदारों की माने तो एक बार पंजीकरण कराने के लिए 300 रुपये शुल्क जमा करना होता है जो आजीवन के लिए हो जाता है।
एक करोड़ से अधिक की किताबें
विभाग से जुड़े लोगों की माने तो पुस्तकालय में धर्मग्रंथ से लेकर ज्ञान से जुड़ी विभिन्न प्रकार की किताबें हैं और समय-समय पर नई किताबें तैयारी के लिए मंगाई भी जाती हैं। पुस्तकालय में एक करोड़ से अधिक रुपये की किताबें हैं। इन किताबों में सबसे अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें हैं। इसके अलावा महादेवी वर्मा, कमलेश्वर, मैथलीशरण गुप्त, ममता कालिया जैसी हस्तियों के उपन्यास मौजूद हैं।
बोले प्रतियोगी परीक्षा के प्रतिभागी
लखनऊ जाकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे जोगिया ब्लॉक के सिसवा बुजुर्ग गांव निवासी समीर त्रिपाठी व जिले के ही रहने वाले मनीष द्विवेदी कहते हैं कि जिले में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए आसानी से किताबें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। ब्लॉक स्तर पर मिनी राजकीय पुस्तकालय खोले जाने की जरूरत है जिससे जिले के युवाओं को सहूलियत मिले।