बांसी में कटान का निरीक्षण करते नपा अध्यक्ष इद्रीश पटवारी।
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में मूसलाधार बारिश होने के साथ ही भारतीय क्षेत्र में भी रुक-रुककर हो रही बारिश से जिले की प्रमुख नदियां राप्ती व बानगंगा खतरे के निशान के निकट बह रही हैं। वहीं, कछार के लोग भयभीत हो गए हैं। नदियों के बढ़ते जलस्तर से प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। बाढ़ राहत में लगे अधिकारियों, कर्मियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
शुक्रवार की रात से लेकर शनिवार दोपहर तक हुई भारी बारिश के बाद कछारवासियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उनका मानना है कि नदियों के जल स्तर में ऐसे ही वृद्धि जारी रही तो निश्चय ही भीषण बाढ़ से जूझना पड़ेगा। संभावित खतरे के मद्देनजर परिवार के अलावा पशुओं के ठहराव समेत राशन इत्यादि की व्यवस्था में जुट गए हैं। इसके अलावा प्रशासन भी सतर्क हो गया है। बाढ़ कंट्रोल रूम को सक्रिय करने के अलावा बाढ़ चौकियों, शरणालयों में व्यवस्था चाक चौबंद रखने समेत अन्य व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों को विशेष नजर रखने के लिए हिदायत दी गई है।
बांध में कटान से नरकटहा क्षेत्रवासी भयभीत
बांसी। राप्ती नदी पुल के बगल में बने नरकटहा प्रोटेक्शन बांध लगातार हो रही बारिश से कटने लगा है, जिसे देख नरकटहा क्षेत्र के लोग काफी भयभीत है। शनिवार सुबह बांध कटने की सूचना मिलते ही मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष मो. इदरीश पटवारी पहुंच गए। सूचना प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों को दिया है। लुंबिनी-दुग्धी मार्ग यानि एनएच सड़क का निर्माण करने वाली कंपनी ने बांसी नगर में राप्ती नदी पर पुल के निर्माण के लिए दो वर्ष पूर्व नरकटहा प्रोटेक्शन बांध को काट दिया था। जिसे बीते वर्ष नदी का जल स्तर बढ़ते ही आनन फानन में बांध का निर्माण कर दिया था। इधर कुछ दिनों से लगातार हो रही बरसात व नदी के बढ़ते जलस्तर से बांध की मिट्टी कटने लगी है, जिसे देख नरकटहा निवासी सहमे हुए हैं।
नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश, बढ़ा जलस्तर
बांसी। लगातार नेपाल की पहाड़ियों व तराई क्षेत्र में हो रही बारिश से क्षेत्र की नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ता देख नदी के तट पर बसे गांव के लोगों कि चिंता बढ़ गई है। हालांकि राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर नीचे है। बांसी नगर में स्थित केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ व पूर्वानुमान केंद्र से रविवार को दिन में एक बजे दिन मिली जानकारी के अनुसार राप्ती का जलस्तर कुछ घंटों से ठहरा है। राप्ती की वर्तमान स्थिति 83. 950 है, जो खतरे के निशान से लगभग एक मीटर नीचे है। राप्ती का बांसी में खतरे का निशान 84.900 है। हालांकि लगातार हो रही बारिश व नदियों के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से तटीय इलाकों में बसे ग्रामीण भयभीत हैं। रविवार को बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, हालत यह है कि नदी के तटीय गांव में बसे लोग सुरक्षित ठौर की तलाश में जुट गए हैं। हालांकि दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से लोग हलकान हैं। वहीं, केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ व पूर्वानुमान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह आठ बजे 80.2 मिली मीटर बारिश रिकॉर्ड किया गया है।