सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते राष्ट्रीय पारिवारिक योजना के लाभार्थियों को समय से लाभ नहीं मिल रहा है। लाभार्थियों के आवेदनों का निस्तारण ही नहीं किया जा रहा है। सबसे अधिक आवेदन सिद्धार्थनगर में लंबित पड़े हैं।
215 आवेदन पेंडिंग होने से लाभार्थी इस योजना से वंचित हैं। समाज कल्याण अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लार्थी भुगत रहे हैं।
मंडल में 432 ऐसे लाभार्थी हैं, जिनके आवेदनों का निस्तारण एसडीएम स्तर पर महीनों से लंबित है। सबसे अधिक 215 सिद्धार्थनगर, बस्ती में 199 और जनपद संतकबीरनगर में 18 आवेदन लंबित हैं। इतना ही नहीं, निस्तारित हो चुके 162 आवेदनों को समय से पोर्टल पर ही डाला नहीं गया।
इस योजना में गरीब परिवार के मुखिया की मृत्यु पर उसके परिवार को सरकार तीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता देती है। उप निदेशक समाज कल्याण आरपी सिंह ने तीनों जनपदों के जिला समाज कल्याण अधिकारियों को चेतावनी दी है।
पत्र में लिखा है कि अगर तीन दिन में सभी आवेदनों का निस्तारण नहीं कराया गया तो वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद कार्रवाई के लिए संस्तुति कर दी जाएगी। बस्ती के जिला समाज कल्याण अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि इस योजना में धन की कोई कमी नहीं है। बताया कि जैसे-जैसे एसडीएम स्तर से आवेदन निस्तारित हो रहे हैं, उसे पोर्टल पर डाल दिया जा रहा है। बताया कि अब तक 50 आवेदनों को पोर्टल पर डाला जा चुका है।
मंडल स्तर पर वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना की जब समीक्षा हुई तो पता चला सैकड़ों गरीबों को अधिकारियों की लापरवाही के चलते योजना का लाभ मिलने में देरी हो रही है। जिस आवेदन को एक सप्ताह में निस्तारित हो जाना चाहिए उसके निस्तारण में महीनों लग जा रहे हैं।
इसके चलते गरीबों को समय से लाभ पहुंचाने की सरकार की मंशा धूमिल हो रही है। इस योजना का लाभ उस परिवार के सदस्य को मिलता है, जिसके मुखिया का निधन हो गया है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में आय की सीमा 46,080 रुपये प्रति वर्ष और शहरी क्षेत्र में 56400 रुपये रखी गई है।
सरकार ने आवेदन करने की प्रक्रिया को पहली जनवरी 2016 से बदल दिया है। नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को अब ऑनलाइन आवेदन करना होगा। मगर एक जनवरी 2016 से पहले जितने भी आवेदन विभाग को मिले हैं, उनं पर यह व्यवस्था लागू नहीं है। सरकार ने पुराने आवेदनों को एक पोर्टल पर डालने का आदेश दिया है। पोर्टल पर डालने की जिम्मेदारी जिला समाज कल्याण अधिकारी को दी गई।
व्यवस्था के तहत जिला समाज कल्याण विभाग को जितने आवेदनों प्राप्त होते हैं, उन्हें वह सत्यापन के लिए संबंधित तहसीलों के एसडीएम के पास भेजता है। एसडीएम अपनी संस्तुति के साथ पत्रावली को वापस विभाग भेज देता है, उसके बाद विभाग लाभार्थी के खाते में तीस हजार रुपये भेजता है।
शासनादेश के तहत आवेदन करने की तिथि से एक सप्ताह में लाभार्थी के खाते में धन चला जाना चाहिए। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि इस योजना में धन की कोई कमी नहीं रहती। बताया कि अगर किसी कारण धन उपलब्ध नहीं है तो टीआर-27 से धन निकालकर लाभार्थी को देने की व्यवस्था है।