केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति एवं नागर विमानन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कपिलवस्तु को बौद्ध आस्था का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा है कि इसे मुख्य पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।
कपिलवस्तु के विकास के लिए 400 करोड़ रुपये के पैकेज का एलान करते हुए उन्होंने कहा कि बौद्ध परिपथ के लिए केंद्र सरकार की ओर से पूर्व में घोषित 170 करोड़ रुपये में से 80 फीसदी राशि कपिलवस्तु के विकास पर खर्च की जाएगी।
शुक्रवार को कपिलवस्तु संग्रहालय के उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. शर्मा ने कहा कि खुदाई में मिले साक्ष्यों से पिपरहवा इलाका ही प्राचीन कपिलवस्तु होने के प्रमाण मिल चुके हैं। नेपाल सीमा पर स्थित यही इलाका बुद्ध की वास्तविक जन्मस्थली और क्रीड़ास्थली है। इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी।
अस्सी के दशक में उत्खनन के दौरान जो अस्थि कलश मिले थे, उन्हें दिल्ली और कोलकाता के म्यूजियम से लाकर यहां स्थापित कराया जाएगा। कपिलवस्तु को एयर टैक्सी से जोड़ने और कपिलवस्तु में बुद्ध की सबसे ऊंची प्रतिमा लगाने के राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल के एलान को दोहराते हुए कहा कि करीब डेढ़ साल में इस इलाके में विकास के नए आयाम नजर आने लगेंगे।
केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति एवं नागर विमानन राज्यमंत्री ने इस मौके पर कपिलवस्तु संग्रहालय की वेबसाइट और पिपरहवा पर आधारित डाक्यूमेंट्री भी लांच की।
कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल, बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकुमार कुंवर, पुरातत्व विभाग के महानिदेशक डॉ. राकेश तिवारी, अधीक्षण पुरातत्वविद् नवरत्न पाठक, म्यूजियम की डायरेक्टर डॉ. उर्मिला संत, उप अधीक्षण पुरातत्वविद् डीएन सिन्हा, राजीव द्विवेदी, डा. केबी शर्मा आदि मौजूद रहे।