सिद्धार्थनगर। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था और बेहतर नहीं हो पा रही है। और तो और बीएसए के निरीक्षण की भी जानकारी स्कूलों तक आने से पहले पहुंच जा रही है। खुद बीएसए इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। इसे लेकर बीएसए जिले के 14 ब्लॉकों के खंड शिक्षाधिकारियों (बीईओ) की रिपोर्ट तैयार करा रहे हैं। यह रिपोर्ट डीएम और शासन को भेजी जाएगी।
सूत्रों की माने में तो नेपाल सीमा से कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां अक्सर ताला लगा रहता है। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक भी हैं जो सांठगांठ के बल पर स्कूलों से गायब रहते हैं। जब बीएसए यहां जांच को जाते हैं तो इसकी रिपोर्ट संबंधित स्कूल के शिक्षकों को मिल जाती है और वे सतर्क हो जाते हैं। बीएस राम सिंह ने बताया कि कई पुराने बीईओ ऐसे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था सुधारने में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस बाबत सभी खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। रिपोर्ट डीएम को और शासन स्तर दी जाएगी। जिससे आवश्यक कार्रवाई हो सके।
स्कूलों की जांच में भी सहयोग नहीं
सूत्रों के अनुसार, स्कूलों के निरीक्षण के दौरान यह बात भी सामने आई है कि कई बीईओ स्कूलों की जांच में सहयोग नहीं कर रहे है। निरीक्षण से पहले ही इसकी सूचना विद्यालयों तक पहुंच जा रही है। ऐसे में शिक्षक अलर्ट हो जा रहे हैं। यही कारण है कि स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जबकि
नोटिस के बाद दर्ज कराया गया था केस
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे 38 शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने के मामले में भी खंड शिक्षा अधिकारियों ने शिथिलता बरती। पहले वे बीएसए के आदेश को दरकिनार करते हुए केस दर्ज कराने से कतरा रहे थे। दो बार छह बीईओ को नोटिस भी दिया गया। डीएम के दखल के बाद बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज हुआ।
ये काम हो रहे हैं प्रभावित
सूत्रों की माने तो खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा ठीक प्रकार से सहयोग न किए जाने से विद्यालयों के संचालन और सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी आ रही है। इससे भनवापुर, लोटन, डुमरियागंज बढ़नी और शोहरतगढ़, इटवा ब्लॉक के कई स्कूूलों में मिड-डे मिल नहीं बन पा रहा है। बच्चों की उपस्थिति में भी कमी आई है। इसका खुलासा बीएसए और एसडीएम के निरीक्षण में भी हो चुका है। जबकि बच्चों की संख्या के मामले में प्रदेश में इलाहाबाद के बाद दूसरे स्थान पर सिद्धार्थनगर जिला है।