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पर्यटन केंद्र बनेगा आमी का उद्गम स्थल

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डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर के बड़े हिस्से को सिंचित करने वाली आमी नदी के उद्गम स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह की पहल पर रविवार को पर्यटन, राजकीय निर्माण निगम व आर्किटेक्चर की टीम ने आमी के उद्गम स्थल सिकहरा पहुंच कर पर्यटकीय सुविधाओं के विकास की संभावनाएं तलाशी। करीब एक घंटे तक टीम ने पूरे स्थल का गहन निरीक्षण किया। इसके आधार पर कार्ययोजना तैयार करने में जुट गई है। राज्य योजना के माध्यम से यहां पर्यटन का विकास कराया जाएगा।
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आमी नदी तराई क्षेत्र की प्रमुख नदियों में शुमार है। डुमरियागंज के सिकहरा ताल से निकलकर यह नदी बांसी, रुधौली, मगहर होते गोरखपुर तक जाती है। बस्ती मंडल के तीनों जिलों के बड़े हिस्से आमी से प्रभावित हैं। देखरेख व संरक्षण के अभाव में विलीन होती नदी को बचाने के लिए पहल हुई है। पिछले दिनों विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने जिला योजना के तहत यहां पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने की मांग की थी। बाद में प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी को पत्र सौंपा। प्रमुख सचिव के निर्देश पर रविवार को राजकीय निर्माण निगम और पर्यटन विभाग के अधिकारियों की टीम डुमरियागंज पहुंची। राजकीय निर्माण विभाग के परियोजना प्रभारी डीपी सिंह, जेई नागेश सिंह, सहायक अभियंता रोहित त्रिपाठी के साथ पर्यटन सूचना अधिकारी डॉ.मोहम्मद मकबूल ने सिकहरा कोहड़ा गांव में आमी के उद्गम स्थल का गहन मुआयना किया। उनके साथ विधायक राघवेंद्र प्रताप भी मौजूद रहे। टीम ने नदी में पानी के स्रोत व निकासी के स्थलों का जायजा लिया। राजकीय निर्माण निगम से संबद्ध आर्किटेक आशीष अवस्थी ने हर पहलू को देखकर नोट किया। टीम में शामिल पर्यटन सूचना अधिकारी डॉ. मकबूल ने बताया कि ऐतिहासिक विरासत को संजोए आमी नदी के संरक्षण के लिए इस स्थल पर राज्य योजना के तहत कार्य कराया जाएगा। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है। शासन से मंजूरी के बाद कार्य आरंभ होगा।

सिकहरा में हो सकेगा नौका विहार
डुमरियागंज। आमी नदी के उद्भव स्थली सिकहरा कोहड़ा में मौजूद तालाब के किनारे सीढ़ियों के निर्माण के अलावा आमी नदी की ऐतिहासिकता को बताने वाला स्तूप, विशाल गेट, समारोह हाल और तालाब के किनारे लोगों के बैठने के लिए टीन शेड के साथ ही लोगों को आकर्षित करने के लिए तालाब में दो नौकायान की भी व्यवस्था की जाएगी। जिससे क्षेत्र के बच्चे यहां आकर तालाब में स्टीमर पर सैर कर लुत्फ उठायेंगे।
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राप्ती तट, चौखड़ा तालाब का भी होगा सुंदरीकरण
आमी के उद्गम स्थल के बाद टीम ने राप्ती तट का भी जायजा लिया। नदी के पूर्व स्थित तट के सुंदरीकरण के अलावा शिवमंदिर को भव्यता देने के साथ ही पार्क व पार्किंग, नदी के किनारे सीसी रोड बनाकर उसे बगहवां घाट से जोडने की रुपरेखा बनाई गई। राप्ती तट को हरकीपैड़ी की तर्ज पर विकसित करने का खाका खींचा गया। टीम ने चौखड़ा स्थित प्राचीन शिवमंदिर के ऐतिहासिक सरोवर का जायजा लिया। इस सरोवर में दुर्लभ प्रजाति के कछुए बड़ी संख्या में पल रहे हैं। सरोवर के विकास और गेट की रुपरेखा बनाई गई। गालापुर स्थित पौराणिक स्थली मां वटवासिनी के मंदिर, देईपार व भानपुर रानी गांव में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर व तालाबों का भी टीम ने अवलोकन किया। इस दौरान डुमरियागंज एसओ राधेश्याम राय, मधुसूदन अग्रहरि, उमेश पांडेय, लवकुश ओझा, श्यामसुंदर अग्रहरि, राहुल सिंह, लालजी शुक्ला, कमलेन्द्र त्रिपाठी, पंकज, दरोगा, अमरेश सिंह आदि मौजूद रहे।

गोपाल... कहते ही तालाब से निकल आए कछुए
डुमरियागंज। चौखड़ा में प्राचीन शिव मंदिर के सामने स्थित ऐतिहासिक सरोवर के किनारे पहुंचने पर जैसे ही गोपाल जी आओ... की आवाज लगाई गई, तालाब में मौजूद कछुए किनारे पर एकत्रित हो गए। बड़े आकार वाले दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का बड़ा झुंड देख टीम के सदस्य हतप्रभ थे। सभी ने कछुओं को दाना खिलाया। यहां तालाब के चारों ओर सीढ़ी निर्माण के अलावा तोरणद्वार और मंदिर के गेट के निर्माण का खाका बनाया।

नौग्रह के पेड़ों से बनेगा पार्क
डुमरियागंज। गालापुर स्थित मां वटवासिनी महाकाली मंदिर के पौराणिक व धार्मिक महत्व और प्रत्येक दिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए यहां पर्यटन विभाग से एक विशाल रामलीला मंच, दर्शनार्थियों के बैठने के लिए टीनशेड, चेजिंग रूम, टॉयलेट, बाउंड्रीवाल, सोलर लाइट, पार्किंग के अलावा नौग्रह के पेड़ों के पार्क और एक अन्य पार्क के निर्माण का खाका तैयार किया गया है।
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