सिद्धार्थनगर। अंगूठे का निशान (थंब इंप्रेशन) लेने के बाद ही रक्तदाता का रक्त लिया जाएगा। पेशेवर रक्तदाताओं पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने यह तरीका अपनाया है। डॉक्टरों की माने तो सामान्य तौर पर स्वस्थ लोग तीन माह में एक बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं। बावजूद इसके रकम के लिए कई बार युवक 500 से 1000 रुपये के चक्कर में माह में दो से तीन बार नाम बदलकर ब्लड डोनेट कर देते हैं। नेपाल सीमा पर होने के कारण अक्सर ऐसी बातें सामने आतीं हैं। जिला अस्पताल में 10 सितंबर को मशीन भी लग गई है।
ऐसे होगा कार्य
ब्लड बैंक में रक्त देने वाले का नाम और उसकी आईडी बनाई जाएगी। थंब इंप्रेशन मशीन में अंगूठा लगाते ही संबंधित व्यक्ति का विवरण कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगा। इससे यह भी पता चल जाएगा कि किस दिन उस व्यक्ति ने खून दिया है।
साल में 11 हजार यूनिट से अधिक की है जरूरत
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एक साल में 11 हजार से अधिक यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। यहां समाजसेवियों सहित अन्य संस्थाओं से जुड़े लोग बड़ी संख्या में ब्लड डोनेट करते हैं।
खून के अवैध कारोबार को रोकने के लिए थंब इंप्रेशन मशीन काफी उपयोगी है। इससे खून धंधा करने वालों पर पूरी तरह से रोक लगेगी। मशीन ब्लड बैंक में लग गई है। जल्द ही पूरा ब्लड बैंक ऑनलाइन हो जाएगा।
अशोक त्रिपाठी, ब्लड बैंक प्रभारी