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बीआडी की घटना के बाद जिले में अलर्ट नहीं

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सिद्धार्थनगर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दर्जनों मासूमों की मौत के बाद भी जिले का स्वास्थ्य महकमा अलर्ट नहीं हुआ है। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो शनिवार को भी ग्रामीण अस्पतालों की दशा सामान्य दिनों जैसी ही रही। बेपरवाह डॉक्टर, लापरवाह कर्मचारी और इलाज को भटकते मरीज सरकारी अस्पतालों में नजर आए। महकमे की ओर से अलर्ट जारी करने की रस्मी औपचारिकता भी नहीं निभाई गई थी। जिम्मेदार यहां अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन की व्यवस्था न होने की दलील देकर पल्ला झाड़ते रहे।
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जिले के अस्पतालों की पड़ताल में व्यवस्था की कई खामियां उजागर हुईं। कहीं पूरा अस्पताल एक कमरे में संचालित होता रहा तो कहीं संसाधनों की व्यवस्था बदहाल थी। बर्डपुर कस्बे में स्थापित ब्लॉक पीएचसी का संचालन सिर्फ एक कमरे में हो रहा है। इसी कमरे में एक तरफ डॉक्टर बैठते हैं तो दूसरी तरफ कंपाउंडर। कमरे में ही इंसेफेलाइटिस मरीजों के उपचार के लिए बेड लगा है तो एक अन्य बेड सामान्य मरीजों के लिए। एक ही टेबल पर आमने-सामने बैठकर डॉ. प्रशांत अस्थाना व डॉ. महेश कुमार मरीजों का उपचार करते रहे।
एक अन्य टेबल पर फार्मासिस्ट मुरली पांडेय मरीजों को दवा दे रहे थे। काउंटर पर मरीजों की भीड़ थी। पानी भरे रास्ते से होकर अस्पताल पहुंच रहे मरीज व्यवस्था की बदइंतजामी से बेहाल दिखे। नौगढ़ पीएचसी चौतरफा पानी से घिरा रहा। मरीजों के लिए यहां तक पहुंचना ही दुष्कर रहा। बांसी के बसंतपुर सीएचसी में डॉक्टर-कर्मचारी पुराने ढर्रे पर रहे। अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार के बाबत सीएमओ डॉ. रतन कुमार का कहना था कि जिले में लिक्विड ऑक्सीजन की कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा यहां कोई दिक्कत नहीं। जहां तक अलर्ट की बात है तो जारी कर दिया जाएगा। जिले में किसी की जान नहीं जाने दी जाएगी।
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