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गलत इंजेक्शन लगाने से किशोर की मौत, चिकित्सक गिरफ्तार

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गोल्हौरा (सिद्धार्थनगर)। अप्रशिक्षित चिकित्सक की लापरवाही ने गुरुवार को एक किशोर की जान ले ली। उल्टी-दस्त से पीड़ित किशोर को अप्रशिक्षित चिकित्सक ने गलत इंजेक्शन लगा दिया। नतीजा कुछ देर बाद हालत बिगड़ गई और किशोर ने दम तोड़ दिया। घटना गोल्हौरा क्षेत्र के बरगदवा चौराहे की है। पिता की शिकायत पर पुलिस ने चिकित्सक को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या व मेडिकल एक्ट की धारा के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया है।
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बरगदवा गांव निवासी प्रेम गुप्ता के पुत्र विशाल (13) की बुधवार की सुबह तबीयत बिगड़ गई। उल्टी-दस्त की शिकायत पर घरवाले उसे नजदीक के अस्पताल ले गए। जहां प्रारंभिक उपचार के बावजूद हालत में सुधार न होने पर चिकित्सक ने बांसी पीएचसी ले जाने की सलाह दी। बांसी न ले जाने की बजाए परिवार के लोग चौराहे पर ही स्थित एक अन्य चिकित्सक नियाज अहमद के पास विशाल को ले गए। आरोप है कि अप्रशिक्षित चिकित्सक नियाज ने लापरवाही बरतते हुए किशोर को गलत इंजेक्शन लगा दिया, नतीजा कुछ ही देर बाद विशाल की हालत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर देख डॉ. नियाज ने इटवा सीएचसी या जिला अस्पताल ले जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। घरवाले किशोर को इटवा ले जाने लगे, रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना से आक्रोशित घरवालों ने चिकित्सक नियाज अहमद पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए गुरुवार की सुबह गोल्हौरा थाने में तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी चिकित्सक नियाज अहमद पर गैर इरादतन हत्या व मेडिकल एक्ट के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। साथ ही शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। गोल्हौरा एसओ आरके गौतम के मुताबिक चिकित्सक को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना की छानबीन की जा रही है।

मरीजों की जान से खेल रहे अप्रशिक्षित चिकित्सक
सिद्धार्थनगर। जिले का स्वास्थ्य महकमा खुद बीमार है। संसाधनों की कमी से जूझते अस्पतालों में डॉक्टर व दवा की कमी का लाभ अप्रशिक्षित चिकित्सक बखूबी उठा रहे हैं। गांवों में चौराहों-तिराहों पर क्लिनिक खोलकर मरीजों की सेहत से खेल रहे हैं। खुद को विशेषज्ञ बताने वाले इन चिकित्सकों के पास न तो कोई डिग्री है और न ही कोई अन्य दस्तावेज। सिर्फ अनुभवों के बल पर यह मरीजों का उपचार धड़ल्ले से कर रहे हैं। पूरे जिले में करीब सौ से अधिक ऐसे क्लीनिक चल रहे हैं, जिनका स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन तक नहीं है। गोल्हौरा के बरगदवा चौराहे पर किशोर को इंजेक्शन लगाने वाले चिकित्सक का भी यही हाल था। एक छोटे से कमरे में मरीजों का उपचार करने वाले इस चिकित्सक के पास इलाज के जरूरी संसाधन भी नहीं है। कोई बोर्ड भी नहीं लगा है। नियम-कानूनों को दरकिनार कर चलने वाले ऐसे अस्पतालों से जिम्मेदार अंजान नहीं, बावजूद कार्रवाई की जगह चुप्पी साधे रहना उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
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