लॉटरी के जरिए 207 एएनएम को मिली तैनाती
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- पहली बार तैनाती के लिए धन उगाही पर डीएम ने लिया निर्णय
- कड़ी सुरक्षा के बीच तैनाती के लिए एएनएम ने निकाली लॉटरी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। प्रदेश स्तर से चयनित होने के बाद संविदा एएनएम के कार्यभार ग्रहण करने संबंधी प्रकरण में जिलाधिकारी गंभीर है। धन उगाही का मामला प्रकाश में आने के बाद 207 एएनएम की नए सिरे से तैनाती दी गई। गठित टीम के समक्ष निकाले गए लॉटरी में उल्लेखित उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चयनित संविदा एएनएम की तैनाती में प्रथम दृष्टया धन उगाही का मामला सही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने पूर्व की तैनाती प्रक्रिया को निरस्त करते हुए लॉटरी सिस्टम से नए सिरे से तैनात करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत डीएम के निर्देशन में गठित जांच टीम के समक्ष कार्यभार करने वाली 207 एएनएम ने लॉटरी निकाला, जिसके आधार पर उन्हें संबंधित उपकेंद्रों पर तैनात किया गया। सीएमओ दफ्तर पर सुबह 8 बजे से ही एएनएम व उनके परिजनों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। 10 बजते ही टीम के सदस्य बैठ गए, फिर शुरू हुई लॉटरी निकालने की प्रक्रिया। शुरुआती दौर में हो-हल्ला मचने की सूचना मिलते ही भारी संख्या में फोर्स पहुंच गई, जिसमें महिला उप निरीक्षक व कांस्टेबल शामिल रहीं। दोपहर में जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू ने सीएमओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। पूरी प्रक्रिया को बारीकी से तहकीकात की। तैनाती के लिए गठित टीम में उपजिलाधिकारी देवेश कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके मिश्रा समेत डॉ. सौरभ चतुर्वेदी, डॉ. एके आजाद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजेश शर्मा शामिल रहे।
मनचाही तैनाती का मंसूबा फेल
जिले के इतिहास में पहली बार स्वास्थ्य महकमे में स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती के लिए लॉटरी पद्धति का प्रयोग हुआ। सुविधा शुल्क लेने के आरोपों की शिकायत बाद डीएम ने कड़े निर्देश दिए। जिसके कारण मनचाही तैनाती की मंशा चकनाचूूर हो गई। इनमें तो कई वास्तव में नजदीक तैनाती के लिए हकदार थी, जिसमें अविवाहित अथवा पारिवारिक रूप से दिक्कतें झेल रही है।
सुविधा शुल्क वापसी की गुहार
सीएमओ कार्यालय पहुंचे जिलाधिकारी को ऐसे अभ्यर्थियों या उनके परिजनों ने घेर लिया, जिन्होंने पूर्व में मनमाफिक उप स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती के लिए कार्यालय के जिम्मेदार कर्मियों को सुविधा शुल्क दिए थे। डीएम ने सीएमओ को लिखित शिकायती पत्र लेकर संबंधित से धनराशि वापस कराने के लिए निर्देश दिया। सीएमओ ने बताया कि संभावित साक्ष्य समेत लिखित शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच किसी ने भी लिखित तौर धन देने की शिकायत नहीं की।