सिद्धार्थनगर। खाद्यान्न-तेल वितरण की आड़ में जिले में चल रही अवैध वसूली इटवा में गयासुद्दीन के पकड़े जाने के बाद वसूली का खेल सार्वजनिक गया है। यह हर तहसील में प्राइवेट व्यक्ति से कराया जा रहा है। प्रतिमाह वसूली की रकम लाखों में हैं। सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार मौन धारण किए हुए हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो गरीब कार्डधारकों में वितरण के लिए जिले में हर माह 1032 किलो लीटर (5160 ड्रम) मिट्टी के तेल का आवंटन है। इसे 16 बड़े व चार छोटे डीलरों के माध्यम से कोटेदारों तक पहुंचाने की व्यवस्था है। सूत्रों के मुताबिक तेल के डीलरों को आवंटन पाने से पहले गयासुद्दीन की तर्ज पर नियुक्त प्राइवेट लोगों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। चढ़ावे की रकम प्रति ड्रम 100-150 रुपये तय है। यह रकम वसूल कर प्राइवेट लोग अपने आकाओं तक पहुंचाते हैं, जहां से सभी हिस्सेदारों में वितरण होता है। इनकी पकड़ इतनी मजबूत होती है कि इनकी सहमति के बगैर कोई कागज आगे नहीं बढ़ता। आवंटन से पहले ही मोटी रकम चढ़ावे के रूप में देने वाले डीलर इसकी पूर्ति अपने नीचे तेल की कटौती कर करते हैं और फिर कार्डधारक तक पहुंचने पर मात्रा कम हो जाती है या फिर रेट बढ़ा दिया जाता है।
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सत्ता बदली तो बढ़ गया रेट
सूत्रों के मुताबिक मिट्टी के तेल पर स्टाकिस्ट से पहले प्रति ड्रम सौ रुपये की वसूली होती थी। सत्ता बदली तो शुरुआती दिनों में इस पर अंकुश लगा, मगर कुछ दिनों बाद ही खेल फिर शुरू हो गया है। इस बार रेट 150 रुपये कर दिया गया है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ डीलरों ने बताया कि वसूली का विरोध भी सामूहिक रूप से किया गया था, लेकिन डरा-धमका कर चुप करा दिया गया। विभागीय दबाव के चलते ही डीलर दो गुटों में बंट गए हैं।
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डीएम तक हो चुकी है शिकायत
कोटेदारों व डीलरों से वसूली की शिकायत पिछले दिनों डीएम तक भी पहुंची थी। फेयर प्राइज शॉप एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजधर पांडेय ने डीएम को पत्र देकर वसूली की शिकायत की थी। विभागीय अफसरों के संरक्षण का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। आरोप था कि विभाग के एक नए अफसर के आने के बाद उत्पीड़न बढ़ा दिया गया है। डीएम ने इस पर जांच के लिए भी निर्देशित किया है।
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बोले अफसर : होगी जांच
मिट्टी के तेल के लिए प्रति ड्रम वसूली के आरोपों को जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने सिरे से खारिज कर दिया। दलील दी कि अभी वह हाल ही में यहां आए हैं। कोटेदारों व डीलरों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसकी बौखलाहट में ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। प्राइवेट लोगों के माध्यम से वसूली की उन्हें जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच कराई जाएगी। उधर, डीएम कुणाल सिल्कू का कहना था कि व्यवस्था में बदलाव के लिए ही कुछ एआरओ के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं। इटवा का गयासुद्दीन प्रकरण की जांच कराई जा रही है, इसमें जिसकी भी संलिप्तता होगी, उजागर हो जाएगी। प्राइवेट लोगों पर भी नजर रखी जा रही है। साक्ष्य मिलने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।