हास्य के माध्यम से कलाकारों ने लोगों को किया सोचने पर मजबूर।
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सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु महोत्सव के दूसरे दिन हास्य नाटक ‘बाप रे बाप’ के माध्यम से कलाकारों ने लोगों बुजुर्गों का सम्मान करने की नसीहत दी और जिंदगी के सच से रूबरू कराया।
लखनऊ की सांस्कृतिक, शैक्षिक सामाजिक संस्था की नाट्य प्रस्तुति ‘बाप रे बाप’ में घर की परिस्थितियों से आजिज होकर पिता जी घर से चले जाते हैं। कुछ समय बाद पति-पत्नी में भी तकरार बढ़ जाती है। ऐसे में नौकर एक पंडितजी के माध्यम से एक शख्स को पिता बनाकर लाता है। नया पिता असली पिता की आदतों से हूबहू मिलता है। सदमे के कारण वह बोल नहीं पाता है। बाद में अपने दोस्त के माध्यम से वास्तविक पिता वहां पहुंच जाते हैं। वह यह बताते हैं वे बहू को बताकर गए थे। इसमें कुत्ते तक को डायबिटीज है इसलिए पड़ोस में भी मीठा नहीं पकने देते और एक सच्चाई क्या जिंदगी है इन बड़े लोगों की भी प्याज जैसी। ये दोनों डायलाग लोगोें को लोटपोट होने पर मजबूर कर देते हैं। इसके लेखक पद्मश्री केपी सक्सेना है। निर्देशन सरिता यादव की अगुवाई में नाट्य प्रस्तुति में अमन सिंह, धीरेन्द्र पांडेय, अभिषेक कुमार, अनुराग शर्मा, रविन्द्र नाथ यादव, असरोज यादव, शुभम, राहुल यादव, स्नेहा की भूमिका अहम रही।