डुमरियागंज। खेती से निराश किसानों के लिए महिलाएं नई उम्मीद बनेंगी। इनकी मेहनत से जिले में सब्जी की किल्लत तो दूर होगी साथ ही रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता भी कम होगी। एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत महिलाओं को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने की मुहिम तेज हो गई है। अगर प्रयास सफल रहा तो अगले साल तक जिले का सब्जी और फल उत्पादन में विशेष योगदान होगा।
एनआरएलएम योजना के तहत कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉकों में गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही जैविक खेती के लिए प्रशिक्षित करने की तैयारी में है। जिले में एनआरएलएम द्वारा चयनित किसी संस्था या फिर रूरल सेल्फ इंप्लाइमेंट ट्रेनिंग के जरिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। गांव में गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को नो कास्ट पार्टनरशिप के जरिए कम लागत में सब्जी व फल उगाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण देने वाली संस्था या कंपनी के सदस्य गांव में जाकर लघु व सीमांत किसानों की मदद से समूह को जमीन उपलब्ध कराएंगे। खेती से होने वाले लाभ का 30 प्रतिशत अंश भूस्वामी को दिया जाएगा। शेष 70 प्रतिशत लाभ समूह की महिलाओं का होगा। समूह की खेती ज्यादातर जैविक विधि पर निर्भर होगी।
यह है तैयारी
एनआरएलएम की ओर से ब्लॉकों में गठित समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिए जाने की तैयारी की जा रही है। प्रत्येक समूह में 12 महिलाएं शामिल होंगी। पहली नवंबर से पहले सभी समूहों को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रिवाल्विंग फंड जारी कर दिया जाएगा। चयनित कंपनी या विभाग, गांव में जाकर समूह को जमीन उपलब्ध कराने की कवायद करेगी। जिन किसानों ने खेती छोड़ दी है उन्हें पार्टनर बनाकर प्रत्येक समूह को लगभग तीन एकड़ भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी।
26 प्रकार की खेती करेंगी महिलाएं
समूह की महिलाएं क्षेत्रीय जलवायु के अनुकूल करीब 26 प्रकार की खेती करेंगी। सब्जियों में पत्ता सलाद, गोभी, पालक, मेथी, धनिया, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, करैला, बोड़ा, बैगन, टमाटर, लौकी, मिर्ची के साथ ही फलों में पपीता, केला आदि की खेती करेंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त राम आसरे ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के जो भी माध्यम मिल रहे हैं, उन तक पहुंचाया जा रहा है। जिले की रूरल सेल्फ इंप्लायमेंट ट्रेनिंग या फिर लीड बैंक द्वारा चयनित कंपनी की मदद से महिलाओं को फल व सब्जी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।