सिद्धार्थनगर। बाढ़ प्रभावित गांव के लोग अभी भी अंधेरे में रात बिता रहे हैं। कारण राहत सामग्री तो वितरण कर दी गई, मगर अभी भी बाढ़ पीड़ितों को केरोसिन नहीं दिया गया है। शासन ने राहत सामग्री के साथ प्रति परिवार पांच लीटर केरोसिन तेल देने का आदेश दिया था, बावजूद जिले में जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बाढ़ पीड़ितों का दर्द कम नहीं हो पा रहा है।
बाढ़ से प्रभावित रहे जिले के 671 गांवों में 85 हजार परिवार के तीन लाख लोगों को राहत सामग्री से लेकर दवा तक मुहैया कराने की प्रशासन की जिम्मेदारी थी। पेट भरने के साथ उजाले की व्यवस्था के मद्देनजर प्रति परिवार को पांच लीटर केरोसिन निशुल्क वितरण कराया जाना था। प्रति परिवार पांच लीटर के औसत से लगभग सवा चार लाख लीटर केरोसिन का वितरण होना था, मगर प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि अभी अधिकांश गांव में तेल का वितरण ही नहीं हुआ है। लोग अंधेरे में बसर करने को विवश हैं। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित जोगिया ब्लॉक की स्थिति बहुत दयनीय है। जोगिया, उदयपुर, महुआ, टिकरिया, लखनापार, ककरही, पोखर भिटवा आदि गांवों में अभी तक एक भी परिवार को केरोसिन वितरण नहीं हुआ है। लखनापार गांव निवासी शोभा देवी, मालती, ज्ञानमति, शशिकला, जोगिया निवासी बाबूराम, केशवराम, उदयपुर निवासी रफीक, रवि जायसवाल, सुग्रीम आदि का कहना था कि राहत सामग्री वितरण के बाद कोई देखने तक नहीं आया कि कैसे लोग जी रहे हैं। केरोसिन का वितरण करने की बात तो दूर है। यही हालत बाढ़ से प्रभावित इटवा, ढेबरुआ, बांसी के अधिकांश गांवों की है। जहां अभी तक केरोसिन का वितरण नहीं हुआ है। इस संबंध में डीएसओ नरेंद्र तिवारी ने कहा कि तेल वितरण लगभग हो चुका है, जहां नहीं वितरण हुआ है वहां भी जल्द वितरण हो जाएगा।