जिला चिकित्सालय में बच्चों को देखते चिकित्सक।
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सिद्धार्थनगर। मौसम का मिजाज बदल चुका है। ऐसे में जरा-सी भी लापरवाही लोगों को बीमार बना सकती है। सुबह-शाम की ठंडक नौनिहालों को बुखार से पीड़ित कर रही है। जिला अस्पताल में बढ़ते मरीज इसकी पुष्टि भी कर रहे हैं। खासकर छोटे मासूम कोल्ड डायरिया, निमोनिया और बुखार जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों की माने तो सतर्कता से ही बीमारी से बचा जा सकता है।
मौसम कब करवट बदल दे इसका कोई अंदाजा नहीं लगता। अस्पताल के आकड़ों पर गौर करें तो इन दिनों जिला अस्पताल में जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं। अस्पताल की ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में डॉक्टरों के पास प्रतिदिन औसतन लगभग तीन सौ बच्चे इस बीमारी से पीड़ित आ रहे हैं। वहीं, अधिक 50 से अधिक उम्र के लोगों की भी संख्या तकरीबन 200 से ज्यादा है। साथ ही इमरजेंसी में बुखार से पीड़ित 50 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि मरीजों की संख्या पिछले 15 दिनों से अधिक हो गई है। कारण मौसम में बदलाव होने के बाद एकाएक लोग गर्म कपड़ों को पहनना बंद कर दे रहे हैं। जबकि इस समय की जो ठंड है, वह बहुत तेजी से लगती है। ऐसे में जुकाम, तेज बुखार पकड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों को हो रही है।
बच्चों पर दें विशेष ध्यान
जिला चिकित्सालय के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी ने बताया कि मौसम बदलाव के साथ बुखार और जुकाम का प्रकोप बढ़ा है। इससे सबसे अधिक बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। इस बदलते मौसम में बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, सुबह और शाम में खुले में न ले जाएं। बाहर की वस्तु न खिलाएं, पानी को उबालकर गुनगुना करने के बाद ही बच्चों को पिलाएं। बासी भोजन से बचें। बुखार होने के बाद चिकित्सक की सलाह के बाद ही दवा दें।
बुखार आने पर इन बातों पर दें ध्यान
बुखार आने के बाद भूखे पेट न रहें। खाली पेट रहने से शरीर में कमजोरी आती है। ठंडे पानी से न नहाएं। पानी को गर्म करने के बाद पीएं। मांसाहारी भोजन न करें। बाहर का खाना न खाएं।