सिद्धार्थनगर। इटवा कस्बे में एक फर्म पर पूर्ति विभाग के नाम पर कोटेदारों से वसूली करते गयासुद्दीन की गिरफ्तारी तो महज बानगी है। वसूली का यह जाल हर ब्लॉक तक फैला है। विभागीय संरक्षण में कोटेदारों से हर माह मोटी रकम वसूली जाती है। मोहरे के हाथ लगने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय जिम्मेदारों की परेशानी बढ़ गई है। गयासुद्दीन के मुंह खोलने से कइयों की गर्दन फंस सकती है।
पूर्ति विभाग अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा चर्चा में रहा है। चाहे वह खाद्यान्न की कालाबाजारी हो या फिर धन उगाही का खेल। इस बार इटवा से गयासुद्दीन के पकड़े जाने के बाद चर्चाएं चरम पर हैं। सूत्रों की मानें तो ब्लॉक स्तर पर पूर्ति विभाग के कई गयासुद्दीन काम कर रहे हैं, जो कोटेदारों से राशन उठान के लिए विभाग से निर्धिरित की गई धनराशि की वसूली कर रहे हैं। नाम न छापने जाने की शर्त पर कुछ कोटेदारों ने बताया कि विभाग की तरफ से नियत आदमी, उठान के समय प्रति कुंतल के हिसाब से पैसा वसूलता है। बताया जा रहा है कि 100 रुपये प्रति कुंतल की दर से पात्र गृहस्थी, 50 रुपये प्रति कुंतल अंत्योदय और 80 रुपये प्रति ड्रम की दर से मिट्टी के तेल के उठान पर वसूली की जाती है। इसमें छोटे ग्रामसभा के कोटेदार से पांच हजार और बड़े कोटेदार से आठ से 15 हजार रुपये तक प्रति माह वसूला जाता हैं। इसके बाद ही राशन का उठान होने वाले रजिस्टर पर हस्ताक्षर हो पाता है। बताया जाता है कि मुख्यालय पर एक ऐसा व्यक्ति है जो विभाग का तो आदमी नहीं है पर विभागीय अधिकारियों से अधिक उसकी धमक है। स्थिति यह है कि उसके इशारे पर कोटेदार हटाए जाते हैं और चयन भी किए जाते हैं। जिले में कोटे की दुकानें लगभग 11 सौ हैं। अगर वसूली के इस खेल मेें एकत्र होने वाले रकम का आंकलन किया जाए तो कोटेदारों से हर माह लाखों रूपये की वसूली की जाती है। हालांकि जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी इन आरोपों से इनकार करते हैं। कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। अगर इस तरह वसूली हो रही है तो छानबीन कर संबंधितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पूछताछ में गयासुद्दीन ने उगले आकाओं के नाम
इटवा। तहसील क्षेत्र में कोटेदारों से वसूली करते पकड़ा गया गयासुद्दीन बड़े लोगों की कमाई का एक माध्यम था। वह कोटेदारों से निर्धारित धनराशि की वसूली कर बड़े लोगों तक पहुंचाने का कार्य करता था। इसके एवज में उसे हर माह मोटी रकम दी जाती थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो गयासुद्दीन ने पूछताछ के दौरान कई विभागीय व अन्य लोगों के नाम उजागर किया है। यही वजह है कि गिरफ्तारी के बाद गयासुद्दीन के आकाओं में बेचैनी बढ़ गई है। पिछले कई वर्षों से कोटेदारों से वसूली के कार्य में लिप्त गयासुद्दीन की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है। गांव में अलीशान मकान के अलावा वह कई संपत्तियों का मालिक भी है। विधानसभा चुनाव के दौरान बीडीसी सदस्यों, ग्राम प्रधानों व कोटेदारों ने इसकी शिकायत भाजपा प्रत्याशी सतीश द्विवेदी से की थी। विधायक बनने के बाद उनकी ही पहल पर गयासुद्दीन वसूली करते पकड़ा गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो बरामद रजिस्टर से साफ होता है कि गयासुद्दीन, विभाग के इशारे पर वसूली करता था। बहरहाल गयासुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद अब यह सवाल सबके जहन में गूंज रहा कि क्या उसके आकाओं पर भी कार्रवाई होगी या फिर खानापूरी कर मामले को निपटा दिया जाएगा।