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दुर्लभ प्रजाति के कछुए आकर्षण का केंद्र, संरक्षण की मांग

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इटवा (सिद्धार्थनगर)। तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत चौखड़ा स्थित पोखरे में सैकड़ों की संख्या में पाए जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के कछुए पल रहे हैं। ऐतिहासिक पोखरे में पल रहे कछुओं की देख-रेख के अभाव में सुरक्षा खतरे में है। ग्रामीणों ने इसके संरक्षण व स्थल के पर्यटकीय विकास की मांग की है।
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इटवा-डुमरियागंज मार्ग स्थित ग्राम चौखड़ा के उत्तर स्थित पोखरा इस समय तीन तरफ से झाड़ियों से ढका है। यही झाड़ियां ही इनके असुरक्षा का कारण भी हैं। यहां पलने वाले भारी-भरकम कछुओं पर हमेशा तस्करों की नजर होती है। शिकारी झाड़ियों ही आड़ लेकर इन दुर्लभ कछुओं का शिकार करने में सफल होते हैं। हालांकि गांव के कुछ जागरूक लोगों की वजह से कछुओं का संरक्षण हो रहा है। पोखरे के समीप शिव जी का मंदिर भी है। स्थानीय निवासी गोपाल जी बताते हैं कि एक आवाज पर कछुए पोखरे के किनारे पर आ जाते हैं। कुछ खाने के मिलने पर सारे कछुओं में उसे पहले छीनने की होड़ लग जाती है। ग्राम प्रधान पुरुषोत्तम सिंह कहते हैं कि बारिश के दिनों में इनकी देखरेख करनी पड़ती है। पोखरे से बहने वाले पानी के साथ यह भी कभी-कभी पोखरे से निकल पड़ते हैं, जिन्हें फिर पोखरे में ले जाकर छोड़ा जाता है। इनके देखभाल व संरक्षण के लिए उपाय होना बेहद जरूरी है। ताकि दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को बचाया जा सके। इस संबंध में पर्यटन सूचना अधिकारी मकबूल आलम ने बताया कि डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रस्ताव पर इस स्थान का सर्वे कर एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। स्वीकृति मिलने पर पोखरे का सौंदर्यीकरण कर दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का संरक्षण किया जाएगा।
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