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97 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में चार करोड़ का गोलमाल

Sat, 22 Jun 2019 10:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र विकास योजना के अंतर्गत 97 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण मेें अनियमितता उजागर हुई है। भारतीय लेखा व लेखा परीक्षा विभाग की ओर से जिला कार्यक्रम अधिकारी के पास पत्र आने से यह मामला प्रकाश में आया। विभाग ने 12 बिंदुओं पर जवाब देने के लिए डीपीओ को पत्र भेजा है। लेकिन दो माह बाद भी विभाग जवाब नहीं दे सका है।
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भारतीय लेखा तथा लेखा परीक्षा विभाग उत्तर प्रदेश प्रयागराज की ओर से 10 अप्रैल 2019 को जिला कार्यक्रम अधिकारी के नाम से आए पत्र में डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के अंतर्गत 97 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण कार्य में अनियमितता का उल्लेख किया गया है। पत्र प्राप्ति के दो माह बाद भी अब तक इस दिशा में जवाब नहीं जा सका है। विभागीय जिम्मेदार एक-दूसरे की बात कर आनाकानी कर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2012-13, 2013-14, 2014-15, 2015-16 के अंतर्गत स्वीकार किया गया था। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग कार्यदायी संस्था थी। विभागीय जानकारों के मुताबिक कार्यदायी संस्था व विभाग के जिम्मेदारों की आपसी मिलीभगत से आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण पूर्ण हुए बगैर ही आदान-प्रदान कर लिया गया।

इन बिंदुओं पर मांगी जानकारी
भारतीय लेखा व लेखा परीक्षा विभाग उत्तर प्रदेश प्रयागराज की ओर से जिला कार्यक्रम अधिकारी से 12 बिंदुओं पर साक्ष्य समेत जानकारी मांगी है। भारत सरकार के डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण संबंधी गाइड लाइन, राज्य सरकार द्वारा इस योजना के तहत निर्माण के लिए प्रस्ताव की छायाप्रति, समय-समय पर जारी प्रथम किस्त 142.50 लाख के संबंध में वित्तीय स्वीकृति की छायाप्रति, द्वितीय किस्त 142.50 लाख के संबंध में वित्तीय स्वीकृति के संबंध में छायाप्रति, तृतीय किस्त 175.75 लाख के संबंध में वित्तीय स्वीकृति के संबंध में छायाप्रति, शासन द्वारा अन्य स्वीकृति आदेश उपरोक्त निर्माण से संबंधित हो, छाया प्रति, विभाग व कार्यदायी संस्था के मध्य अनुबंध गठित हुआ हो तो उसकी छायाप्रति, 97 आंगनबाड़ी केंद्रों से संबंधित वर्क कंप्लीशन रिपोर्ट की छायाप्रति, केंद्रों के पूर्ण होने की स्थिति में संबंधित अभिलेखों की छायाप्रति, केंद्रों के निर्माण की अद्यतन वित्तीय एवं भौतिक प्रगति रिपोर्ट की छायाप्रति शामिल हैं।
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आधा दर्जन आलमारियों में रिकॉर्ड कैद
बाल विकास एवं पुष्टाहार के जनपदीय कार्यालय में लिपिकों को आवंटित आधा दर्जन आलमारियों के ताले विभागीय कार्यों के लिए उनकी मनमर्जी पर ही खुलते और बंद होते हैं। अधिकारियों की ओर से रिकार्ड मांगे जाने पर टाल मटोल किया जाता है। यही कारण है कि तमाम विभागीय कार्यों में बाधा उत्पन्न होने के साथ ही शासन स्तर पर भेजे जाने वाले रिपोर्ट भी समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार इन पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैैं। लगभग एक माह पूर्व गैर जनपद से आए एक लिपिक को निर्माण संबंधी पटल दिया गया, पर उन्हें सिर्फ चालू वित्तीय वर्ष के अलावा अन्य किसी वित्तीय वर्ष में निर्माण कार्यों की जानकारी नहीं है। बार-बार कहने के बाद भी चार्ज न देने की भी शिकायत सामने आई है।

विभिन्न वित्तीय वर्षों में स्वीकृत 97 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण संबंधी भारतीय लेखा व लेखा परीक्षा विभाग की ओर से पत्र मिला है। जवाब देने के लिए संबंधित लिपिकों को निर्देशित किया गया है। इसके बाद भी अभिलेख उपलब्ध न कराए जाने पर दोषी लिपिक पर कठोर कार्रवाई के साथ ही मनमर्जी से खुल व बंद हो रही आलमारियों के बारे में उच्चाधिकारियों से निर्देश के बाद आवश्यक कदम उठाएंगे। रिपोर्ट जल्द ही प्रेषित कर दी जाएगी।
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-राजीव सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
 
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