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ब्लॉक प्रमुख के बाद जिला पंचायत पर नजर

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सिद्धार्थनगर। सपा नेता रामकुमार यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। डुमरियागंज ब्लॉक प्रमुख की जंग में करारी शिकस्त देने के बाद विपक्षी खेमे ने अब उन्हें मिनी सदन में भी घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सदस्यों को साधने की कवायद शुरू हो गई है। 48 सदस्यों वाले इस सदन में अध्यक्ष को अपदस्थ करने के लिए 25 सदस्यों का साथ चाहिए। सूत्रों की मानें तो बहुमत से अधिक सदस्य अध्यक्ष के विरोध में लामबंद भी हैं, मगर नेतृत्व को लेकर पेंच फंसा हुआ है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर अविश्वास प्रस्ताव के लिए विपक्ष किसे अगुवा चुने, इसे लेकर गतिरोध बना बना हुआ है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि यह गुत्थी भी जल्द ही सुलझा ली जाएगी। विपक्ष किसी महिला सदस्य पर दांव लगाने की तैयारी में है।
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रामकुमार यादव चिनकू पूर्ववर्ती सपा सरकार में बेहद प्रभावशाली रहे। शासन सत्ता का लाभ पाकर ही पहले पत्नी पूजा यादव को जिला पंचायत का अध्यक्ष बनाया और फिर अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित होने पर अपने करीबी गरीबदास गौतम को कुर्सी पर बैठा दिया। अध्यक्ष का चेहरा कोई भी रहा हो, लेकिन पांच वर्षों तक सिक्का चिनकू का ही चला। अब जब शासन सत्ता बदली है तो दांव उल्टा पड़ने लगा है। सत्ताधारी दल और उससे जुड़े लोग चिनकू की चौतरफा घेरेबंदी में जुटे हुए हैं। डुमरियागंज ब्लाक प्रमुख मिट्ठू लाल यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इसी की एक कड़ी है। अल्पसंख्यक बाहुल्य इस ब्लाक में भाजपाई खेमे के लिए अविश्वास प्रस्ताव बेहद मुश्किल माना जा रहा था, मगर सियासी तरकस के अलग-अलग तीर से हर समीकरण साधते हुए भाजपा यहां बाजी मारने में कामयाब रही। उत्साहित विपक्षी खेमे की निगाह अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर है। पिछले दिनों डेढ़ दर्जन सदस्यों ने बैठक कर इसके मंसूबे जाहिर भी कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो जिला पंचायत सदस्यों का एक बड़ा खेमा अध्यक्ष से अंसतुष्ट है। उनकी शिकायतें अलग-अलग हैं। कोई काम न मिलने से नाराज है तो किसी को दल विशेष का वर्चस्व खटक रहा है। जिला पंचायत में लंबे समय से टेंडर अटके हुए हैं। इसमें भी अध्यक्ष के रवैये को लेकर सदस्यों की नाराजगी बढ़ी है। लिहाजा अब अविश्वास के लिए वह एकजुट होने लगे हैं। बदलाव की रणनीति भी बन चुकी है, बस असल पेंच नेतृत्व को लेकर है। अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और मिनी सदन में भाजपा या सहयोगी दल का इस वर्ग से कोई चेहरा नहीं है। ऐसे में किसी तीसरे पर दांव लगाना मजबूरी है। फिलहाल अध्यक्ष समेत कुल आठ सदस्य ही आरक्षित वर्ग से हैं। इनमें दो सदस्य सपा के पूर्व विधायक विजय पासवान के परिवार के हैं, जबकि एक बसपा जिलाध्यक्ष शेखर आजाद के परिवार से। शेष चार में से तीन महिलाएं हैं। अध्यक्ष विरोधी खेमा किसी महिला सदस्य पर दांव खेलने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक नौगढ़ ब्लॉक से सदस्य किसमति देवी, जोगिया से ज्ञानमति और उसका से शांति क्रमश: इस रेस में शामिल हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक सदस्य ने बताया कि सभी सदस्य अविश्वास के लिए तैयार हैं। इनमें से ही किसी एक नाम पर जल्द ही सहमति बना ली जाएगी। इसके बाद डीएम से मिलकर प्रस्ताव सौंप दिया जाएगा। उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या पार्टी विशेष से नहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ है। सदस्यों अपने मान-सम्मान के लिए अविश्वास लाएंगे।
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