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जेहन में आज भी ताजा है संपूर्ण क्रांति की यादें

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शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। जेपी के नेतृत्व में छिड़े संपूर्ण क्रांति आंदोलन में सहभागी बने लोकतंत्र सेनानियों के जेहन में वह यादें आज भी ताजा हैं। सोमवार को संपूर्ण क्रांति दिवस पर उन्हें कुरेदा गया तो पुरानी यादों के साथ उत्पीड़न व शासन-प्रशासन के खौफ का वह दृश्य भी उनकी आंखों के सामने कौंध गया। लोकतंत्र सेनानियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने जेपी के नेतृत्व में आंदोलन में हिस्सा लेते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए शासन सत्ता का उत्पीड़न और परेशानी झेली।
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आदर्श टीचर कालोनी निवासी शिक्षक नेता लालता प्रसाद चतुर्वेदी जेल में बिताए 17 दिनों को आज भी नहीं भुला पाए हैं। बताया कि शासन-सत्ता की हनक के चलते जेल में बंदियों में भय बना हुआ था कि वह जिंदा वापस बाहर निकलेंगे या नहीं। 17वें दिन मजिस्ट्रेट ने जमानत मंजूर कर रिहा किया तो प्रशासन ने देश पर खतरा बताते हुए मीसा में जेल भेज दिया। काफी जद्दोजहद के बाद आपातकाल हटा तो तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को इसका कड़ा प्रतिरोध भी झेलना पड़ा। नगर के वरिष्ठ व्यापारी विजय परसराम का कहना है कि प्रशासन ने फर्जी ढंग से ट्रेन लूट का आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया था।
पुरानी नौगढ़ निवासी लोकतंत्र रक्षक सेनानी बलीभद्र मिश्र कहते हैं कि देश पर हावी होती तानाशाही खत्म करने के लिए आवाज उठाया तो रेलवे लाइन उखाड़ने के आरोप में उन्हें जेल भेज दिया गया था। जयप्रकाश नारायण इसके विरोध में आंदोलन पर थे। तानाशाही के खिलाफ आंदोलन छेड़ा गया था, जिसके समर्थन में पूरे देश के युवा एक हो गए थे। हम भी उनके आदर्शों से प्रेरित थेे। मैं उस वक्त शोहरतगढ़ शिवपति इंटर कॉलेज में इंटर का छात्र था। सुबह लगभग 11 बज रहा था, कक्षाओं मेें पढ़ाई चल रही थी। इस बीच मैंने घंटी बजा दी और विद्यालय के सारे बच्चे स्कूल से बाहर निकल आए। बस इतनी सी बात के लिए पुलिस ने हमें हिरासत में ले लिया और रेलवे लाइन की पटरी लूट का आरोपी बनाते हुए बस्ती जेल में बंद कर दिया गया था। 45 दिनों तक बस्ती जिला कारागार में बंद रहे इसके बाद जमानत पर रिहा हुए।
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