बांसी/मिश्रौलिया (सिद्धार्थनगर)। बाढ़ को लेकर प्रशासिक मशीनरी की संवेदनहीनता जारी है। प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव के लिए जहां लोग छटपटा रहे हैं। वहीं, बांधों के टूटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री के दौरे से पहले बांसी तहसील क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी पर सतवाढ़ी के पास अशोगवा-मदरहवा बांध टूट गया। पानी के दबाव के चलते बांध देखते ही देखते 20 मीटर तक टूट गया। सतवाढ़ी गांव के 8 घर जहां पानी में पूरी तरह समाहित हो गए, वहीं, दो दर्जन गांवों पर भी खतरा मंडराने लगा है। गांव के लोग कटे हुए बांध के दूसरे छोर पर डेरा जमाए हुए हैं। वहां फंसे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे हैं। प्रशासन ने अभी तक उन्हें किसी भी प्रकार की कोई सहायता नहीं दे सका है।
बाढ़ से पूर्व बचाव के नाम पर लाखों रुपया पानी की तरह बहाने की कलई परत दर परत खुलती जा रही है। समय रहते बांधों की सुरक्षा को लेकर बरती गई लापरवाही अब खुलकर उजागर हो रही है। बांसी क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना एक और बांध दरक गया। हालत यह हो गई कि कुछ ही पलों में बांध बीस मीटर तक धराशाई हो गया। बांध में अचानक इतना बड़ा गैप होने से आसपास के गांवों में भयानक तबाही मची। बांध कटने से आसपास के गांव सतवाढ़ी, नबेलवा, बिहरा, घरहारा, असिधवा, बड़हरा, खिरिया, अशोगवा, तिघरा, नरायनपुर, चांदेगडिय़ा, पिपरा, मजगवा, नरकटहा, श्रीनगर, भड़ही, नगवा आदि सैकड़ों गांवों में पानी घुस गया। इन गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी पूरी तरह पानी से घिर गई। कटान स्थल के नजदीक गांवों में एक दर्जन से ज्यादा घर तेज बहाव में धराशाई हो गए और हजारों बीघा फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए छतों पर शरण ले रहे हैं और सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। अचानक बांध टूटने से एक महिला समेत तीन बच्चों के सतवाड़ी गांव में एक छत पर फंसे होने की सूचना है। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम को सूचना दी गई है। बांध कटने के घंटों बाद लोग प्रशासन की राह देख रहे हैं लेकिन उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा। नदी के बांध पर लोग अपनी जान बचा कर भाग रहे हैं। घरों में रखा सामान, अनाज व जमा पूंजी सैलाब में तबाह हो गई। एसडीएम प्रबुद्ध सिंह का कहना है कि घर कितने गिरे हैं, यह तो हमें सही पता नहीं है पर अभी तक कोई जनहानि नहीं हुई है। दो दर्जन से अधिक लोगों को एनडीआरफ टीम घरों से सुरक्षित बाहर ला रही है। बांध पर जो भी लोग मौजूद हैं, उनके खाने के लिए लाई-भूजा व पानी की व्यवस्था कर दी गई है।
दो बांधों पर रिसाव, सहमे लोग
बांसी। नगर से होकर गए दो बांधों पर पानी का रिसाव होने से नगरवासी भयभीत हैं। बांसी-नौगढ़ मार्ग के पूर्वी छोर से होकर गए नरकटहा-सोनखर बांध पर राजमहल के पास तीन स्थानों पर रिसाव हो रहा है। नदी का पानी बांसी-नौगढ़ मार्ग पर बांध के अंदर फैल रहा था। नगरवासियों का आरोप था कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई पर वह अभी तक रिसाव रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहा है। इसी प्रकार बांसी-इटवा मार्ग के पूर्वी तरफ से होकर गए बांसी-डुमरियागांज बांध से रतनसेन इंटर कॉलेज के सामने देवियापुर चौराहे के पास रिसाव हो रहा है। यह पानी सड़क के अंदर से होते हुए सीधे रतनसेन डिग्री कॉलेज के परिसर में फैल रहा है। तहसील प्रशासन को इसकी सूचना लोगों ने तो दी है पर अभी तक सीपेज रोकने का कोई इंतजाम नहीं हुआ है। यही नहीं नरकटहा प्रोटेक्शन बांध में एक बड़ा होल हो गया है। इसे न भरे जाने से चिंतित सभासद परमात्मा ने स्वयं मजदूर रख कर होल की मरम्मत कराया।
इनसेट
बांध दर बांध दरक रहे, नहीं टूट रही प्रशासन की नींद
मिश्रौलिया। जिले में बांधों के टूटने के बाद मची बाढ़ की तबाही के बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी। इसी नतीजा रहा कि शुक्रवार को बांसी क्षेत्र के सतवाढ़ी के पास बूढ़ी राप्ती नदी पर बना अशोगवा-मदरहवा बांध टूट गया। बताया जा रहा है कि नदी का जलस्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंचने के साथ ही बांध के टूटने की आशंका जताई जा रही थी। कई जगहों पर बांध से रिसाव हो रहा था। जिसकी सूचना स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को दी थी। बावजूद इसके बांध को बचाने के लिए कोई पहल नहीं की गई। यही कारण है कि प्रकृति के साथ जिम्मेदारों की लापरवाही बाढ़ के तबाही के नई इबारत लिख रही है। लोग तबाह हो रहे हैं और समय रहते प्रशासन कोई कार्रवाई करने के बजाए मुसीबत आने का इंतजार करता दिख रहा है। बांध टूटने के बाद इलाके की स्थिति बेहद भयावह हो गई है। कितने मकान जमींदोज हुए, लोगों की संपत्ति का कितना नुकसान हुआ और कितनी संख्या में लोगों के जान पर आफत बनी हुई है इसका आंकलन करना बेहद मुश्किल हो रहा है। चारों तरह जल सैलाब इस कदर तांडव मचा रहा कि प्रभावित गांवों में जाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा। ऊपर प्रशासनिक मशीनरी की लापरवही लोगों की मुसीबतें और भी बढ़ा रही हैं।