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Siddharthnagar News: 13 नाबालिगों ने जीती न्याय की जंग, 21 दरिंदों को मिली सजा

Sun, 19 Jan 2025 10:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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श्याम सुंदर तिवारी
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सिद्धार्थनगर। दरिंदगी का शिकार होने के बाद हिम्मत नहीं छोड़ी, धमकियों और प्रलोभन के आगे विचलित नहीं हुए। न सिर्फ डटकर मुकदमा लड़ा, बल्कि हर तारीख पर पीड़ित किशोरियां परिवार के साथ खड़ी रहीं।
नतीजा एक साल में 13 नाबालिग बेटियां न सिर्फ न्याय की जंग जीतने में कामयाब रहीं, बल्कि दरिंदगी करने वाले 21 दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा तक पहुंचाने के लिए लड़कर समाज में मिसाल पेश की।
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ताकि बेटियों के प्रति अपराध करने वालों के हौसले पस्त हों और अपराध करने से डरें। माना जा रहा है कि अदालतों द्वारा ऐसे मामलों में सख्ती दिखाने से नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगेगी। इसमें पुलिस विभाग के मॉनीटरिंग सेल की निगरानी और अदालत तक गवाहों को पहुंचाने और मजबूती से साक्ष्य प्रस्तुत करना भी अहम बताया जा रहा है। क्योंकि एक-एक केस की मॉनीटरिंग करके सजा तक पहुंचाने का कार्य करने के लिए एक अलग सेल काम कर रहा है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत सिद्धार्थनगर पुलिस की मॉनीटरिंग सेल ने जघन्य, पॉक्सो और दुष्कर्म के मामलों को चिह्नित किया। इसमें 13 ऐसे मामले सामने आए। नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म की वारदातें हुई थीं। मानीटिरिंग सेल ने इन केसों पर काम किया।
केस डायरी से लेकर विवेचक तक से बात की। इसके बाद चार्ज फ्रेम किया। न्यायालय में साक्ष्य को मजबूती से रखा। गवाहों को मोटिवेट करने के साथ- साथ उन्हें भरोसा दिलाया कि गवाही करें, सुरक्षा की जिम्मेदार पुलिस की है, और गवाह स्टैंड हुए और न्यायालय तक पहुंचे। इसके बाद मामला सजा तक पहुंचा।
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इस प्रकार एक साल में 13 नाबालिग बेटियों जिनकी अस्मत के साथ खेला गया। इस जुर्म को अंजाम देने वाले 21 आरोपियाें को सजा मिली। बेटियों को न्याय की इस लड़ाई में जीत मिली। दो ऐसे मामले रहे, जिसमें पुलिस ने विवेचना तेजी से की। जहां वर्षों न्याय के लिए लग जाते हैं, इनमें एक और पांच माह में केस दर्ज करने के साथ ही सजा तक हो गई और लड़ाई पर ही विराम लग गया है। (संवाद)ा
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