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नहाय-खाय के साथ छठ व्रत आज से

Sat, 10 Nov 2018 10:17 PM IST
siddharthnagar
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जमुआर नाले के छठ घाट पर रंगरोगन में जुटा एक शख्स। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। नहाय खाय के साथ ही चार दिन तक चलने वाले सूर्यषष्ठी(छठ) व्रत की शुरूआत आज(रविवार) से होगी। इसके तैयारियों के लिए मुख्यालय के जमुआर घाट,डुमरियागंज, बांसी, शोहरतगढ़, उस्का बाजार आदि प्रमुख कस्बों में घाटाें पर साफ सफाई का काम तेज हो गया। वहीं व्रती महिलाओं ने वेदी बनाने की भी शुरूआत कर दी।
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व्रत को देखते हुए बाजार में पूजन से जुड़ी सामग्री की बिक्री भी शुरू हो गई है। मुख्यालय के उत्तरी छोर स्थित जमुआर घाट पर नगर पालिका परिषद की ओर से साफ-सफाई कराई जा रही है। साफ-सफाई की हकीकत जानने के लिए उपजिलाधिकारी सदर उमेश चन्द्र निगम, पुलिस क्षेत्राधिकारी दिलीप सिंह मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। मौके पर मिली खामियों को दूर करने के लिए कर्मियाें को निर्देश दिए। घाट पर पेयजल की उपलब्धता के साथ ही चूने व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने के लिए निर्देशित किया।

व्रत की मान्यता
मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सर्वप्रथम च्यवन मुनि की पत्नी सुकन्या ने अपने जराजीर्ण और अंधे पति के आरोग्य के निमित्त किया था। इस व्रत के प्रभाव से च्यवन को नेत्र ज्योति प्राप्त हुई और वह जवान हो गए थे। श्रीराम चन्द्र जी ने राज्याभिषेक के बाद सीता जी के साथ यह व्रत किया था। इसके फलस्वरूप उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए थे। द्रौपदी ने भी अज्ञातवास के दौरान राजपाट की पुन: प्राप्ति के की मनोकामना से संकल्प के साथ यह व्रत किया। मनु के पुत्र राजा प्रियवत पहले नि:संतान थे। महर्षि कश्यप के परामर्श से पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ किया। उन्हें पुत्र तो प्राप्त हुआ, लेकिन वह मृत था। उस समय वह विलाप करने लगे। आकाश से षष्ठी देवी अवतरित हुई और उन्हें डाला छठ व्रत रखने के लिए कहा। इस व्रत के बाद राजा को सुंदर व मेधावी पुत्र की प्राप्ति हुई।
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इन सामग्रियों की बिक्री तेज
छठ पर्व की तैयारियों के साथ ही पूजा के सामानों की दुकानें भी सज गई हैं। इसके साथ ही लोगों कोशी, सूप, दउरा, साड़ी, गन्ना, नारियल, सेब, केला, आम, अमरूद, संतरा, शरीफा, अरखा का पत्ता, कोहड़ा, मूंगफली, अमरक, तरबूज, अनार, गन्ना, चूरा, बैर, गाजर, बंडा, मूली आदि की खरीदारी प्रारंभ कर दी।

चार दिन मनाया जाएगा छठ पर्व
दीपावली के चौथे दिन अर्थात कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी(11 नवंबर) से नहाय खाय के साथ छठ व्रत की शुरूआत होगी। इसके अगले दिन यानी 12 नवंबर को खरना होता है। इस दिन सायंकाल महिला गन्ने के रस से बनी खीर खाती हैं। षष्ठी (13 नवंबर ) को शाम को और सप्तमी (14 नवंबर ) का प्रात: काल अर्घ्य देती हैं।
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