डुमरियागंज। प्रसव के बाद नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अब गांवों में तैनात आशा वर्कर को आधुनिक बनाने की पहल शुरू कर दी है। सोमवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जीवन रक्षक कौशल प्रशिक्षण के बाद भनवापुर चिकित्साधिकारी ने आशा वर्कर को स्वास्थ्य जांच संबंधी किट बांटी।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेंद्रमणि ओझा ने कहा कि नवजात शिशुओं की देखभाल बेहतर तरीके से कैसे की जाए। यही प्रशिक्षण का उद्देश्य है। सभी आशा वर्करों को नवजात शिशुओं के घर 42 दिनों में 7 बार जाना पड़ेगा। इसके बाद बच्चों की घर पर ही अच्छे तरीके से जांच करनी होगी। आशा वर्करों को स्वास्थ्य किट देते हुए उन्होंने कहा कि किट में वयस्क व नवजात के वजन की मशीन, थर्मामीटर, लेमिनेटेड नियमित टीकाकरण व प्रसव पूर्व जांच सारणी, तौलिया, साबुन आदि मौजूद हैं। सरकार आशा वर्करों को आधुनिक बना रही है। इसकी सहायता से आप लोग अब और बेहतर तरीके से अपना काम कर पाएंगी। इस दौरान माया मिश्रा, ज्ञानमती, अर्चना, माया पांडेय, अनीता, सुशीला, विंदवासिनी, मालती, मेराज अहमद, एके दूबे आदि मौजूद रहे।