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कुपोषण की चपेट में जिले का हर तीसरा बच्चा

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डेमो - फोटो : डेमो
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सिद्धार्थनगर। देश के 108 आकांक्षी जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर ने हाल ही में शिक्षा और स्वास्थ्य में तीसरी रैंकिंग हासिल की है। बावजूद इसके जिला कुपोषण मुक्त नहीं हो पा रहा है। आंकड़ों के अनुसार जिले का हर तीसरा बच्चा कुपोषित है। बावजूद इसके जिम्मेदार नहीं चेत रहे हैं।
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कुपोषण से बच्चों को मुक्ति दिलाने के लिए पिछले वर्ष शासन के निर्देश पर अफसरों ने गांवों को गोद लिया। कुछ समय तक तो अफसर गांवों में गए, बाद में अफसरों ने गांवों मेें जाना छोड़ दिया और कुपोषण मुक्ति की योजना में आशानुरूप सफलता नहीं मिल सकी। यह हाल तब है जब कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार दिल खोलकर रुपये खर्च कर रही है। बच्चों और धात्री महिलाओं को सेहतमंद बनाने के लिए जिले के 3112 आंगनबाड़ी केंद्रों को हर महीने करीब 32 हजार बोरी पुष्टाहार आवंटित हो रहा है। इसका स्वास्थ्य लाभ धात्री महिलाओं व बच्चों से ज्यादा पशुओं को मिल रहा है। गांव से शहर तक पुष्टाहार वितरण में लापरवाही हावी है। निदेशालय से मिलने वाला पुष्टाहार कितने लाभार्थियों तक पहुंचा इसका संज्ञान लेने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि जिले में 99148 बच्चे आज भी कुपोषित है। इनमें 76433 बच्चे कुपोषण का दंश झेल रहे है। और 22715 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में है।

वजन करने से छूट ही जाते हैं पांच फीसदी बच्चे
0 से पांच वर्ष तक के बच्चों का हर महीने वजन कराने का निर्देश है। जिले में इनकी संख्या है। इनमें पांच प्रतिशत बच्चे हर माह वजन कराने से वंचित भी रहते है। ऐसे में अगर सही वजन हो जाए, तो संख्या और भी बढ़ सकती है।
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98 गांवों को लिया गया था गोद
जिले के 98 गांव ऐसे चिह्नित किए गए थे, जहां पर कुपोषण से बच्चों की संख्या ज्यादा थी। इन गांवों को एक साल कुपोषण से मुक्त करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया था। लेकिन गांवों का दुर्भाग्य ऐसा है कि महज दो गांव ही अब तक कुपोषण मुक्त हो सके है।

अब तक कुपोषण से 23 गांवों को मुक्त किया जा चुका है। इसमें सीडीओ द्वारा गोद लिया गांव भिटिया भी शामिल है। शेष गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए विभागीय प्रयास सतत स्तर प्रयास किए जा रहे हैं।
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- राधाकृष्ण त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी

आकड़े एक नजर में
आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चे - 3,37,417
कुपोषित बच्चों की संख्या - 76,433
अतिकुपोषित बच्चों की संख्या- 22,715
सामान्य बच्चों की संख्या- 2,38,269
ये हैं इंतजाम
आंगनबाड़ी केंद्र- 3112
गोद लिए गए गांवों की संख्या- 98
आंगनबाड़ी वर्कर और सहायिका- 6224
 
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