सिद्धार्थनगर। नीति आयोग की सूची में चिह्नित देश के 115 और प्रदेश के आठ पिछड़े जिलों में शुमार सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। हाल यह है कि करीब तीन माह पूर्व हैंडओवर होने के बाद भी सौ बेड के मातृ शिशु अस्पताल डॉक्टरों की उपलब्धता न होने के कारण संचालित नहीं हो पा रहा है।
जिला मुख्यालय पर संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 19 करोड़ 91 लाख 83 हजार की लागत से बने मातृ एवं शिशु चिकित्सालय को राजकीय निर्माण एजेंसी ने बनाकर भवन नौ जुलाई को हैंडओवर कर दिया। संचालन न होने के पीछे चिकित्सकों का पद स्वीकृत न होना बताया जा रहा है। यह हाल तब है जब सांसद और पांचों विधायक भाजपा या उसके घटक दल से जुड़े हुए हैं। एक माननीय तो प्रदेश में कैबिनेट मंत्री भी हैं। सदर विधायक श्याम धनी राही ने बताया कि संचालन की दिशा में जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री और एमएचएम के निदेशक से मिलकर अस्पताल का संचालन जल्द से जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
जिला अस्पताल के परिसर में निर्मित सौ बेड के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसके प्रयास किया जा रहा है। एनएचएम निदेशक से वार्ता कर शीघ्र डाक्टरों के पदों की स्वीकृति के साथ ही तैनाती का अनुरोध किया जाएगा।
- डा. आरके मिश्रा, सीएमओ