फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छह साल में कहां-कहां भू अधिग्रहण, दस्तावेज तलब

Wed, 21 Mar 2018 11:21 PM IST
siddharthnagar
विज्ञापन
cag - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की टीम जिले में पिछले छह वर्षों में हुए भूमि अधिग्रहण की जांच करेगी। इस फरमान के बाद जिले में खलबली मच गई है। निदेशक भूमि अध्याप्ति विभाग के पत्र के बाद विभाग अधिग्रहण से जुड़ी पत्रावलियां कैग को उपलब्ध कराने की कवायद में जुट गया है। छह वर्षों में एनएच-233 निर्माण के लिए सबसे बड़ा 37.10 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि अधिग्रहण हुआ है। वहीं एसएसबी के बटालियन हेडक्वार्टर के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित है।
विज्ञापन


विकास को गति देने के मकसद से जिले में कई कार्ययोजनाएं पिछले कुछ वर्षों में मंजूर हुईं। इसमें एक प्रोजेक्ट लुंबिनी से दुद्धी को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-233 भी है। ककरहवा-रुधौली खंड की 66 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण के लिए बांसी व नौगढ़ तहसील के करीब 44 गांवों की 37.10 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई थी। इसके लिए 26244.38 लाख रुपये मुआवजा निर्धारित करते हुए वर्ष 2013-14 से अधिग्रहण शुरू हुआ था।

विभागीय सूत्रों की मानें तो भूमि अधिग्रहण कर मुआवजा निर्धारण और वितरण के दौरान बड़े पैमाने पर खेल हुआ। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से चहेतों को भरपूर लाभ पहुंचाया गया। कई स्थानों पर खाली भूमि पर भवन दिखाकर तो कहीं मकान के कमरों की संख्या अधिक दर्शाकर भू-स्वामियों को करोड़ों रुपये मुआवजे का अतिरिक्त लाभ दिया। कई ऐसे भी प्रकरण रहे, जिसमें कम भूमि का अधिक मुआवजा दिया गया। खामियों के चलते अधिग्रहण की जो प्रक्रिया 2015 तक पूरी हो जानी थी, वह अब तक चल रही है। बहरहाल, अब सूबे के 32 जिलों में भूमि अधिग्रहण की कैग के जरिए ऑडिट के फरमान के बाद इस खेल में शामिल लोगों की सांसे अटक गई है।
विज्ञापन


अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाने लगे हैं और पत्राचार भी शुरू है।विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी राजेश सिंह का कहना है कि कैग से ऑडिट के निर्देश की जानकारी मिली है। निदेशक स्तर से जो भी सूचनाएं मांगी जा रही हैं, उपलब्ध कराई जा रही हैं। पिछले छह वर्षों में एनएच-233 के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ है। इंडो-नेपाल बार्डर प्रोजेक्ट के लिए भी भूमि अधिग्रहण विभाग के जरिए होना था, लेकिन बाद में कार्यदाई संस्था समझौते के माध्यम से स्वत: अधिग्रहण कर रही है। एसएसबी के बटालियन हेडक्वार्टर के लिए पकड़ी-जोगिया मार्ग पर जमीन चिह्नित है। इसकी भी अधिग्रहण प्रक्रिया लंबित है।

भ्रष्टाचार में पकड़ा जा चुका है लिपिक
अधिग्रहीत भूमि के मुआवजा वितरण में गड़बड़ियों को लेकर भूमि अध्याप्ति विभाग का एक चर्चित लिपिक भ्रष्टाचार निवारण टीम के हाथों पकड़ा भी जा चुका है। करीब डेढ़ साल पहले बर्डपुर के एक भू-स्वामी से मुआवजा के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। काफी प्रयासों के बाद भी मुआवजा न मिलने से भू-स्वामी ने लिपिक की शिकायत की थी, जिसके बाद भ्रष्टाचार निवारण की टीम ने छापेमारी कर लिपिक को रंगे हाथ पकड़ा था।

तीन कमरे के मकान को 23 दिखा दिया मुआवजा
शहर से सटे भीमापार में रेलवे क्रॉसिंग के पास एक मकान में कमरों की संख्या बढ़ाकर दर्शाते हुए मुआवजा देने की भी शिकायत सामने आई थी। करीब छह माह पहले प्राप्त इस शिकायत की जांच के लिए डीएम ने तीन सदस्यीय टीम भी गठित की। टीम ने भी प्रथम दृष्टया मामले को संदेहास्पद माना था। हालांकि बाद में मामला लंबित हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें