सिद्धार्थनगर। निकाय चुनाव के दंगल में हर सीट से कई दावेदारों ने ताल ठोंक रखी थी। जीत का टेंपो हाई करने के लिए महीनों से दिन-रात एक किए हुए थे। अपनी ढपली-अपना राग अलापते प्रत्याशी जीत का दावा करने से नहीं थक रहे थे, मगर रविवार को जब वोटों का पिटारा खुला तो सब हक्के-बक्के रह गए। किसी की उम्मीदें टूटी हुईं तो कइयों के सपनों का महल धराशायी हो गया। खुद को सिकंदर बताने वाले चुपचाप लोगों से किनारा कर कमरे के अंदर कैद हो गए। वहीं, विजेता प्रत्याशी जीत का जश्न मनाने में नहीं चूके।
जिले की छह निकायों में अध्यक्ष पद पर 67 और सभासद-सदस्य के 103 पदों के लिए 696 प्रत्याशियों ने चुनावी मैदान में दावेदारी पेश की थी। इसमें कई इस क्षेत्र के पुराने अनुभवी थे तो कइयों को दिग्गजों का समर्थन भी मिला हुआ था। इसके आधार पर वह वोटों की गणित लगाकर चुनावी जंग फतह करने के दावे कर रहे थे। मगर जनता की अदालत में न तो अनुभव काम आया और न ही दिग्गजों का साथ। जनता जनार्दन ने उसे ही चुना, जो उनके मन मुताबिक था। चुनाव का परिणाम जानने के लिए सुबह से ही मतगणना स्थल पर प्रत्याशियों और समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा था। हर कोई पूरी तैयारी के साथ जीत की खुशी मनाने आया था, मगर परिणाम आने के बाद ज्यादातर की इच्छा अधूरी रह गई। समर्थकों ने तो फिर भी खुद को संभाल लिया, लेकिन प्रत्याशी मौके पर टिके रहने में भी सहज नहीं दिखे। जैसे ही उन्हें हार का इल्म हुआ तुरंत भीड़ से किनारा करते हुए वह सीधे घर का रूख कर गए। कमरे में बंद होकर हार का गम मनाया और भीतरघातियों की पहचान में जुटे रहे।
प्रत्याशी हारा तो समर्थकों ने भी बदला पाला
सिद्धार्थनगर। राजनीति के मैदान में अमूमन नेताओं को ही पाला बदलते देखा गया है, मगर रविवार को कई समर्थक भी इधर से उधर होते नजर आए। वह आए तो थे अपने प्रत्याशी की जीत का जश्न मनाने, मगर उसकी हार पर सांत्वना देने में भी रूचि नहीं दिखाई। अलबत्ता विरोधी खेमे में शामिल होकर जीत की खुशियां बांटने लगे।
बुद्ध बालिका डिग्री कॉलेज स्थित सिद्धार्थनगर नगर पालिका व उसका बाजार नगर पंचायत के मतगणना स्थल के बाहर सुबह से ही उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल था। हर चेहरे पर जीत का विश्वास झलक रहा था। कइयों का भरोसा तो इतना मजबूत था कि वह जीत का जश्न मनाने की पूरी तैयारियों के साथ आए थे। माला-फूल और मिठाई के डिब्बे उनकी हाथों में देख ऐसा लग रहा था, जैसे उन्हें तो सिर्फ जीत की घोषणा का ही इंतजार है। परिणाम आया तो उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। मौके की नजाकत भांपते हुए समर्थकों ने अपने प्रत्याशी का साथ छोड़ा और विजेता की जयकार में जुट गए। नेताओं की तरह समर्थकों को भी पल भर में रंग बदलते देख हर कोई हैरान था। पाला बदल कर विजय जुलूस में शामिल हो रहे एक समर्थक का कहना था कि अब छाती पीटने से क्या होने वाला है। आज जीत की खुशी में शामिल हो जाएंगे तो पहले की गलती भी छिप जाएगी।