सिद्धार्थनगर। सेवा नियमावली में संशोधन कर समायोजन के लिए आंदोलित शिक्षा मित्र रविवार को भी बीएसए कार्यालय पर डटे रहे। रिमझिम बारिश के बावजूद हौसला न खोते हुए शिक्षामित्रों ने मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। पांचवें दिन सांसद जगदंबिका पाल ने धरने पर आकर शिक्षा मित्रों की लड़ाई लड़ने का एलान किया तो इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी ने उनकी मांग शासन तक पहुंचाने का वादा किया।
धरने को संबोधित करते हुए सांसद ने शिक्षामित्रों की मांग को न्यायोचित ठहराया। कहा कि जब सूबे की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त होने की कगार पर थी तब शिक्षामित्रों ने इसे संभाला। उनके बूते ही प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो पाया है। कोर्ट के फैसले से सूबे के 1.72 लाख शिक्षामित्रों के लिए संकट खड़ा हो गया है। उनका मानदेय मनरेगा मजदूरों से भी कम हो जाएगी। शिक्षामित्रों के साथ पूरी सहानुभूति है। उनकी पीड़ा को दूर करने के लिए हर दरवाजे तक जाएंगे।
शिक्षामित्रों को न्याय दिलाने तक उनकी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। आश्वस्त किया कि प्रदेश के सभी सांसदों से हस्ताक्षर कराकर प्रार्थना पत्र के साथ मुख्यमंत्री से मिलेंगे। पुरजोर पैरवी कर शिक्षामित्रों को उनका हक दिलाएंगे।
इस दौरान हेमंत शुक्ला, इंद्रजीत यादव, श्यामबिहारी चौधरी, यशवंत सिंह, अरुण कुमार, पवन कुमार, रिंकू चौधरी, राजेंद्र यादव, अमित सिंह, सत्यभामा मिश्रा, विजय पांडेय, राकेश गुप्ता, ओमप्रकाश, गोरख प्रसाद, रामराज गुप्ता, बागेश्वरी मिश्रा, लक्ष्मी विश्वकर्मा, किसलावती गुप्ता, रूपा, निधि गुप्ता, अशोक यादव, पूर्णिमा यादव, अवनीश पांडेय, राम सजीवन यादव, शांति देवी, सुनीता सिंह, संगीत सिह, प्रियंका सिह, शशि सिंह, प्रमिला देवी, पूनम, रीता, अनिता पांडेय, सुनीता मिश्रा, राम शरन, चंद्रावती, चंद्रमोहन, मुक्तनाथ, घनश्याम यादव, नंदलाल, दीपनारायन पाल, हरिश्चंद चौधरी, अभिषेक श्रीवास्तव, शोभा रानी आदि मौजूद रहे।
विधायक से मिले शिक्षामित्र, मांगपत्र दिया
इटवा। डाक बंगले में रविवार को आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल विधायक डॉ.सतीश द्विवेदी से मिला। उन्हें मांगपत्र देकर शिक्षामित्रों की मांग को शासन तक पहुंचाने और नियमावली में संशोधन कराकर दोबारा समायोजन की मांग की। शिक्षामित्रों ने विधायक से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हमारे समक्ष रोजीरोटी का संकट पैदा हो गया है। साथी हताशा की स्थिति में है। कई शिक्षामित्र आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। सेवा नियमावली में संशोधन कर फिर से समायोजन कर उन्हें इस स्थिति से उबारा जा सकता है। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष हेमंत शुक्ला, हरिश्चंद्र, पवन शुक्ला, अवधेश पांडेय, रमा सिंह, रामकुबेर, केसरी नंद, रामगोपाल श्रीवास्तव, सीताराम, रामसुरेश, मोती चंद्र, सदानंद, यशवंत शुक्ला, परमात्मा प्रसाद, गौरी लाल, राजाराम, आलोक प्रसाद आदि शामिल रहे।