सिद्धार्थनगर। ढेबरुआ क्षेत्र के परसा देवाइचपार गांव से तीन दिनों से लापता मां-बेटी को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है। घटना का सनसनीखेज पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दावा किया है कि महिला ने ही दोनों बेटों की हत्या कर शव गांव के तालाब में फेंक दिया और फिर बेटी को लेकर फरार हो गई थी। हत्या का कारण पति से अनबन को बताया जा रहा है। पूछताछ के बाद महिला को जेल भेज दिया गया, जबकि बालिका को परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया।
26 जुलाई की सुबह परसा देवाइचपार गांव के तालाब में दो बच्चों की लाश मिली थी। इनकी पहचान गांव के ही अर्जुन के पुत्र सुरेंद्र (5) व वीरेंद्र (2) के रूप में हुई। बच्चों की मां अनीता व बहन लक्ष्मी (7) गायब थीं। बच्चों का पिता घटना से तीन दिन पहले ही मुंबई के लिए निकला था। सनसनीखेज मामले से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। आईजी मोहित अग्रवाल, डीआईजी राकेश साहू ने मौके पर आकर निरीक्षण किया। तीन टीमें गठित कर गायब मां-बेटी की तलाश व घटना की छानबीन की जा रही थीं। इस बीच शुक्रवार सुबह ढेबरुआ पुलिस को क्षेत्र के ही मधवानगर में गन्ने के खेत में मां-बेटी के मौजूद होने की सूचना मिली। एसओ मुकेश राय ने महिला पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर उन्हें बरामद किया। पुलिस ऑफिस में प्रेस वार्ता के दौरान डीआईजी राकेश साहू व एसपी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि महिला ने पूछताछ में खुद दोनों बेटों के हत्या की बात स्वीकार की है। एसपी ने बताया कि बच्चों को लेकर पति से उसका आए दिन झगड़ा होता था। पिछले 15 दिनों से पति-पत्नी में बोलचाल भी बंद थी। मुंबई जाने से पहले भी पति-पत्नी में विवाद हुआ था। इसी से गुस्से में आकर उसने बुधवार सुबह गला दबाकर दोनों बच्चों को मार डाला और शव तालाब में फेंक दिया। वह खुद भी बेटी को लेकर तालाब में कूद गई थी, लेकिन बाद में बेटी लक्ष्मी के चीखने-चिल्लाने व भयभीत चेहरा देखकर उसका इरादा बदल गया और वह उसे लेकर तालाब से निकल गई। इसके बाद से ही वह इधर-उधर घूम रही थी। एसपी ने बताया कि महिला अनीता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वहीं बालिका लक्ष्मी को उसके दादा लौटन की सुपुर्दगी में सौंपा गया है।
पर्दाफाश पर उठ रहे सवाल
तीन दिनों से लापता मां-बेटी को बरामद कर पुलिस ने भले ही घटना की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है, मगर मामले में कई झोल ऐसे हैं, जिससे पुलिसिया कहानी लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही। पुलिस ने महिला की गिरफ्तारी पास के ही मधवानगर गांव से दर्शाई है, अगर महिला अपनी बेटी के साथ यहीं थी तो फिर तीन दिनों तक आस-पास के सभी गांवों की जांच पड़ताल के दौरान पुलिस के हाथ क्यों नहीं आई। घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसपी सत्येंद्र कुमार, डीआईजी राकेश साहू और गुरुवार को पहुंचे आईजी मोहित अग्रवाल ने निरीक्षण के कुछ अन्य लोगों के भी शामिल होने का शक जताया था, जबकि पर्दाफाश के दौरान पूरे मामले में सिर्फ महिला को अकेले कातिल बताया गया है। घटना के दिन गांव के कुछ लोगों ने महिला को बाइक पर किसी के साथ जाते हुए देखने की बात पुलिस को बताई थी। सीमा से सटे बलरामपुर के गैसड़ी गांव के आस-पास भी महिला को देखे जाने की बात सामने आई थी, जबकि पुलिसिया कहानी में इसका कोई जिक्र ही नहीं है।
महिला को बोलने से रोकते रहे अफसर
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पुलिस अफसरों ने महिला को सामने पेश तो किया, लेकिन उसे बोलने का मौका नहीं दिया। महिला बार-बार कुछ कहना चाह रही थी, लेकिन अफसर उसे चुप कराते रहे। मीडियाकर्मियों ने पूछताछ की कोशिश की तो यह कहकर रोक दिया गया कि सारा घटनाक्रम अधिकारी बता ही रहे हैं। अगर महिला ने पुलिस के सामने इतनी सहजता से हत्या की बात कबूली है तो फिर मीडिया से दूरी क्यों रखी गई।