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नाटकीय ढंग से पास हुआ बढनी में अविश्वास प्रस्ताव

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बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। नाटकीय उतार-चढ़ाव के बाद बढ़नी ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। प्रस्ताव के दौरान सत्ता का दबाव अफसरों पर साफ दिखा। निर्धारित समय तक बहुमत के सदस्यों की अनुपस्थिति पर चुनाव अधिकारी ने पहले प्रस्ताव खारिज होने की घोषणा कर दी थी। आधे घंटे के बाद सदस्यों को वापस बुलाकर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसे लेकर ब्लॉक कार्यालय पर टकराव की स्थिति भी बनी रही। प्रमुख खेमे ने सत्ता के दबाव में धांधली का आरोप लगाया है।
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ब्लॉक प्रमुख विफई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सोमवार की तिथि नियत थी। कुल 73 सदस्यों वाले सदन में प्रस्ताव पास करने के लिए 37 सदस्यों की उपस्थिति जरूरी थी। सुबह 11 बजे से चर्चा शुरू होनी थी, लेकिन 1 बजे तक महज 36 सदस्य ही पहुंच सके। हाल ही में हुए उपचुनाव में निर्वाचित सदस्य के शपथ ग्रहण न होने के चलते उसकी उपस्थिति को नकार दिया गया। बताते हैं कि बहुमत की संख्या पूरी न होने पर चुनाव अधिकारी एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने की बात कही। मीडिया में बयान भी दे दिया। कुछ ही देर बाद सत्ताधारी दल के नेताओं के मौके पर पहुंचने पर तस्वीर बदल गई। बैरिहवा के बीडीसी सदस्य अनिरुद्ध तिवारी के पहुंचने पर एसडीएम ने सभी सदस्यों को दोबारा सदन में बुलाया। मतदान के दौरान 37 वोट अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े। इस घटनाक्रम पर ब्लॉक प्रमुख खेमे ने कड़ी नाराजगी जताई। विफई देवी ने सत्ता के दबाव में धांधली का आरोप लगाया। टकराव के आसार को देखते हुए मौके पर मौजूद पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में लिया। घंटों तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 37 सदस्यों ने वोट किया है। लिहाजा प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। इस मौके पर सपा के राज्यसभा सदस्य आलोक तिवारी, शोहरतगढ़ विधायक अमर सिंह चौधरी, रिंकू पाल, राजेश द्विवेदी, प्रभारी बीडीओ उमेशचंद्र तिवारी, सीओ जटाशंकर राव, सुनील कुमार सिंह, एसओ मुकेश कुमार राय, चौकी प्रभारी बढ़नी हरेंद्र नाथ राय आदि मौजूद रहे। बढ़नी ब्लॉक की अपदस्थ प्रमुख विफई देवी ने प्रशासन पर सत्ता के इशारे पर धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तय समय तक सदस्यों की अनुपस्थिति पर कोरम पूरा नहीं हो सका था। बाद में सदस्यों को घर से बुलाकर दोबारा वोट कराया गया। सत्ताधारी दल के दबाव में प्रशासन ने धांधली की है। लोकतंत्र का गला घोंटा गया है। इसके खिलाफ उच्चस्तर तक शिकायत की जाएगी। ब्लॉक प्रमुख के अपदस्थ होने पर विरोधी खेमा खुशी से झूम उठा। शांति पासवान के नेतृत्व में 37 सदस्यों ने अविश्वास के पक्ष में वोट किया। जीत की खुशी मनाते हुए सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और गले लगाया। इस मौके पर विधायक अमर सिंह चौधरी, राजू पाल, राजेश द्विवेदी, संतोष पासवान और रामचंद्र पासवान आदि मौजूद रहे। इस बाबत डीएम कुणाल सिल्कू का कहना था कि अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में बिना शपथ लिए एक सदस्य के पहुंचने की सूचना मिली थी, जिसे मतदान से रोक दिया गया। बहुमत से प्रस्ताव पास होने की सूचना मिली है। एसडीएम से विस्तृत जानकारी ली जा रही है। धांधली के आरोप निराधार हैं। सिर्फ अविश्वास पास हुआ है, किसी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित नहीं किया गया है। रिक्त पदों पर जल्द ही उपचुनाव होंगे, अगर बहुमत होगा तो चुनाव में उसे साबित करें। निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से चुनाव कराया जाएगा।
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