सिद्धार्थनगर। सूबे की सरकार भले बदल गई हो, मगर अफसरों के दफ्तर पहुंचने का रवैया अब तक नहीं बदला है। मनमानी कार्यशैली के आदती अफसरों के लिए सीएम के निर्देशों का भी कोई असर नहीं है। सुबह 9 से 11 बजे तक दफ्तर में बैठकर फरियादियों की शिकायत सुनने का निर्देश जारी हुए दो माह बीत चुके हैं, मगर यहां तय समय पर ढूंढने से भी जिम्मेदार नहीं मिलेंगे। शुक्रवार को अमर उजाला की पड़ताल में यह उजागर भी हो गया। नौ बजे तो दूर पौने दस बजे तक विकास भवन के अधिकांश विभागों में अफसर-कर्मचारी नहीं पहुंचे थे। उनके कमरों में ताला लटका था। यही स्थिति 11 बजे के बाद भी बनी रही। सहकर्मियों ने बताया कि 11 बजे तक दफ्तर में बैठने के बाद साहब फील्ड में चले गए। दफ्तर कब आए, इस बाबत कोई जवाब नहीं था।
जिले के विकास का खाका खींचने वाले इस विभाग में सीडीओ, डीडीओ, डीपीआरओ, डीपीओ समेत दो दर्जन से अधिक विभागों के कार्यालय हैं। पड़ताल के दौरान सुबह 9.20 बजे सिर्फ डीडीओ सुदामा प्रसाद ही कार्यालय में मौजूद थे। इनके अलावा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन एसएस उपाध्याय भी दफ्तर में बैठे थे। अन्य कार्यालयों में विभागाध्यक्ष की कुर्सियां खाली थीं। कइयों के तो दफ्तर ही नहीं खुले थे। खुद सीडीओ अनिल कुमार मिश्र कार्यालय में मौजूद नहीं रहे। उनके सहकर्मियों का कहना था कि साहब डीएम से मिलने गए हैं। फोन पर उनसे संपर्क किया गया तो वह कॉल रिसीव करने की स्थिति में भी नहीं थे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीश सिंह के कक्ष पर ताला लटक रहा था। उनका कार्यालय भी बंद था। दोपहर में मिले साहब का कहना था कि वह साढ़े नौ बजे तक आ गए थे। कर्मचारी तो 10 बजे ही आते हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी बीडी पांडेय का कक्ष तो खुला था, लेकिन पौने दस बजे वह उपस्थित नहीं हुए थे। कैमरे से क्लिक होता देख किसी कर्मी ने फोन किया तो 10 बजे वह दफ्तर पहुंचे। दलील थी कि आज जरूरी काम के चलते थोड़ा देर हो गया। समाज कल्याण अधिकारी के तबादले के बाद अतिरिक्त कार्यभार अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय को सौंपा गया है। वह न तो समाज कल्याण में मौजूद थे और न ही अल्पसंख्यक कल्याण में। जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी मीनू सिंह भी दस बजे तक दफ्तर नहीं पहुंची थीं। एआर कोऑपरेटिव अशोक कुमार, लघु सिंचाई, नेडा, परियोजना अधिकारी डूडा के कक्ष भी बंद रहे। सुबह 10 बजे तक ऑफिस न पहुंचने वाले इन अफसरों को जब 11 बजे ढूंढा गया तब भी वही स्थिति थी। नाम न छापने की शर्त पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि यह तो रोज की स्थिति है। वैसे साहब आकर करें भी क्या, फरियादी तो सुबह नौ बजे आते नहीं। सवाल है कि फिर सीएम के आदेश का मतलब क्या। बहरहाल, इस बाबत सीडीओ अनिल कुमार मिश्र का कहना था कि वह जरूरी कार्य से डीएम के पास गए थे। कुछ देर में लौट आए तो फिर साढ़े तीन बजे तक दफ्तर में ही रहे। सभी अफसरों को 9 से 11 बजे तक ऑफिस में मौजूद रहने को कहा गया है। कुछ विभागीय मीटिंग में भी गए होंगे। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।