सिद्धार्थनगर। गेहूं खरीद के लिए जिले में 98 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। बगैर पंजीकरण वह अपनी उपज को नहीं बेच सकेंगे। लिहाजा किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी होगा। एडीएम की निगरानी में खरीद होगी जिन्हें जिला खरीद अधिकारी नियुक्त किया गया है।
किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिले और आढ़तियों के हाथ किसानों को औने-पौने दाम पर उपज न बेचना पड़े। इसलिए शासन द्वारा खरीद व्यवस्था में सुधार की गई है। इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर क्रय समितियों को सक्रिय किया गया है। पहली अप्रैल से शुरू होने वाले गेहूं खरीद के लिए विभागीय तैयारी अंतिम दौर में है। खरीद के लिए जिले में विभिन्न संस्थाओं के 98 क्रय केंद्र बना दिए गए हैं। साथ ही बोरे और अन्य व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। जिला विपणन अधिकारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि गेहूं खरीद के लिए क्रय केंद्र बन चुके हैं। तैयारियां अंतिम चरण में हैं। गेहूं बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
जिले में ढाई लाख हेक्टेयर पर हुई है बुवाई
जिले में दो प्रमुख फसलें धान व गेहूं लगाई जाती हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में तकरीबन ढाई लाख हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की बुवाई की गई है। इसमें अधिकांश छोटे किसान शामिल हैं।
प्रति क्विंटल मिलेगा यह दर
इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही किसानों को ढलाई व छनाई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त सहित 1860 रुपये प्रति क्विंटल के दर से भुगतान किया जाएगा।
बैंक खाते से होगा भुगतान
किसानों को गेहूं बेचने के बाद उन्हें रुपये बैंक खाते के माध्यम से किया जाएगा। इसलिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करते समय बैंक खाते का जिक्र करना होगा जिससे सीधे बैंक खाते से रुपये भेजा जा सके। रुपये खरीद होने के 72 घंटे के भीतर हो जाएगा।
46 क्रय केंद्र हुए कम
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 46 क्रय केंद्र कम हुए हैं। पिछले वर्ष जिले में गेहूं खरीद के लिए 144 क्रय केंद्र बने थे, जबकि इस वर्ष 98 क्रय केंद्र ही बने हैं। माना जा रहा है कि क्रय केंद्रों की संख्या कम होने से किसानों को अपनी उपज को बेचने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इन संस्थाओं के बने इतने केंद्र
खाद्य निगम 12
पीसीएफ 75
यूपी एग्रो 01
कर्मचारी कल्याण निगम 03
पंजीकृत समिति 07