सिद्धार्थनगर। सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों के फिजूल खर्च रोकने के लिए शासन ने नई रणनीति तैयार की है। प्राइवेट अस्पताल में इलाज पर मेडिकल रिबर्समेंट(चिकित्सा प्रतिपूर्ति) की सुविधा को सरकार ने अब खत्म करने का निर्णय लिया है। सीएमओ को पत्र भेजकर व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिक्र है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पर ही विभाग की ओर से खर्च का भुगतान मेडिकल रिबर्समेंट के रूप में मिलेगा।
किसी भी बीमारी से पीड़ित होने पर सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारी व अफसर सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के बजाय निजी अस्पतालों में इलाज करवाते थे। इसके एवज में भारी-भरकम बिल बनवाते थे। इसका भुगतान विभाग को करना पड़ता था। इससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की बात भी सामने आती थी। इस पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए व्यवस्था तब्दीली लाई है। प्रदेश भर के सीएमओ को पत्र भेजकर डीजी हेल्थ ने सरकारी अस्पताल में ही रिबर्समेंट की सुविधा देने की बात कही है। कहा है कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने वाले कर्मचारियों को रिबर्समेंट की सुविधा न दी जाए। सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि शासन की ओर से पत्र मिला है। सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के बाद ही रिबर्समेंट की सुविधा कर्मचारियों को दी जाएगी।
बड़ी बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के मंडल महामंत्री डॉ. अरुण प्रजापति ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से गलत है। बड़ी बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं हो सकता है। जो बड़े सरकारी अस्पताल हैं, वहां इलाज कराने में महीनों लग जाते हैं। ऐसे में सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।