लोहिया कला भवन में नाटक प्रस्तुत करते कलाकार।
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सिद्धार्थनगर। लोहिया कला भवन में नाट्योत्सव के दूसरे दिन मनोज सिंह टाइगर द्वारा लिखित नाटक ‘मांस का रुदन’ का मंचन हुआ। इस दौरान कलाकारों ने विरोधाभास के बावजूद हिरन और कुत्ते के बीच प्रेम को जीवंत प्रस्तुति प्रदान करने का प्रयास किया। वहीं, इसके माध्यम से स्वार्थ, भूख, स्वाद, रोमांच के लिए किसी भी जीव की हत्या करना महापाप है, इस भाव का संदेश दिया गया। नाटक का निर्देशन पार्थ सारथी रॉय द्वारा किया गया।
शनिवार को नाट्य मंचन में कलाकारों की प्रस्तुति सराहनीय रही। एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन के बावजूद प्रेम को दर्शाते हुए कलाकारों ने नाटक के माध्यम से प्रयास किया। एड़ियां रगड़ने दे जमीं, हमें यकीं है पानी यहीं से निकलेगा! इसी विचारधारा से जुड़ी कहानी के दो मुख्य पात्र हिरनी ‘जेरी’ और कुत्ते ‘डोरा’ की प्रेम कहानी रही। जहां एक ओर डोरा मांस के बिना एक दिन भी नहीं रह सकता वहीं दूसरी ओर जेरी मांस की गंध को भी सहन नहीं कर सकती। बावजूद इसके दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते हैं।
ये दोनों ठाकुर साहब के यहां रहते हैं और उन्हें बेहद प्रिय भी होते हैं परंतु एक दिन मेहमाननवाजी और अपने रुतबे के लिए ठाकुर साहब जेरी को कटवा देते हैं। जैसे ही डोरा, जेरी के मांस को देखता है, वो आक्रामक होकर चिल्लाने लगता है और रोते हुए ठाकुर साहब से प्रश्न करता है कि क्यूं हमेशा बलवान, कमजोरों पर अत्याचार करते हैं, क्या मात्र अपने स्वार्थ और स्वाद के लिए किसी भी जीव की हत्या कर देना सही है ? क्या बिना जीव की हत्या किए अपनी भूख शांत नहीं की जा सकती। इन्हीं सब सवालों के साथ डोरा भी उसी जगह अपने प्राण त्याग देता है जहां पर जेरी की हत्या की गई थी। इस नाटक के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि जीवन पर सबका समान अधिकार है। मात्र अपने स्वार्थ, भूख, स्वाद और रोमांच के लिए किसी भी जीव की हत्या करना महापाप है। संचालन विजित सिंह ने किया। इस मौके पर डीएम कुणाल सिल्कू, सीडीओ हर्षिता माथुर, एसएसबी कमाडेंट जनार्दन प्रसाद, एसडीएम सदर सौम्या पांडेय, एएसपी मुन्ना लाल आदि अधिकारी व नागरिक मौजूद रहे।