उत्तर प्रदेश में उपनिरीक्षकों की सीधी भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा संशोधित नियमों से नहीं हो सकेगी। हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार चाहे तो पुराने नियम पर भर्ती प्रक्रिया जारी रख सकती है। यदि उसे नियम बदलकर ही परीक्षा लेनी है तो पुरानी अधिसूचना को रद कर नए सिरे से अधिसूचना जारी करनी होगी।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका यह आदेश रैंकर्स (आरक्षी, मुख्य आरक्षी) से प्रोन्नति द्वारा दारोगा बनने वालों पर लागू नहीं होगा।
न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने राजेश कुमार सहित अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर यह आदेश दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अपर महाधिवक्ता सीबी यादव ने कहा कि सरकार को रैंकर्स की प्रोन्नति के नियम बदलने का अधिकार है।
लेकिन सीधी भर्ती में शारीरिक परीक्षा में किए गए संशोधन को वापस लेेने पर सरकार विचार कर रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नौ जुलाई के आदेश में संशोधन कर दिया। नौ जुलाई को कोर्ट ने समूची प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
उल्लेखनीय है कि उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा 2011 में शारीरिक दक्षता परीक्षा के नियमों में परिवर्तन कर दिया गया था। नए परिवर्तन के अनुसार अब पुरुष अभ्यर्थियों को 35 मिनट में 4.8 किलोमीटर दौड़ना होगा, जबकि महिलाओं को 2.4 किलोमीटर 20 मिनट में दौड़ना है।
पूर्व में यह दूरी 10 किलोमीटर 60 मिनट में पुरुषों के लिए और पांच किलोमीटर 35 मिनट में महिलाओं के लिए रखी गई थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि पुराने नियम पर 70 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा दे चुके हैं। अब नियम बदलने से जो लोग परीक्षा पास कर चुके हैं, उनके अधिकारों का हनन होगा।