बौद्ध तपोस्थली में विशेष प्रार्थना करते अनुयायी।
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों से गुलजार रही। उपासकों ने आनंद बोधि पर बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में विशेष प्रार्थना की।
भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि बौद्ध अनुयायिओं के प्रार्थना स्थल या उपासना स्थल मठों को विहार कहते हैं। विहारों में बुद्ध प्रतिमा होती है। विहार में बौद्ध भिक्षु निवास करते है। उच्च शिक्षा में धार्मिक विषयों के अलावा अन्य विषय भी शामिल थे, और इसका केंद्र बौद्ध विहार ही था। इनमें से सबसे प्रसिद्ध बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय था।
अन्य शिक्षा के प्रमुख केंद्र विक्त्रस्मशिला और उद्दंडपुर थे। यह भी बिहार में ही थे। इन केन्द्रों में दूर दूर से यहां तक की तिब्बत से भी विद्यार्थी आते थे। जहां उन्हें निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती थी। इन विश्वविद्यालयों का खर्च शासकों की ओर से दी गई मुद्रा और भूमि के दान से चलता था। नालंदा को दो सौ ग्रामों का अनुदान प्राप्त था।
बिहार शब्द विहार का अपभ्रंश रूप है। यह शब्द बौद्ध (मठों) विहारों कि क्षेत्रीय बहुलता के कारण (बिहार) तुर्कों द्वारा दिया हुआ नाम है। बौद्ध विहार एकनाल में बनवाया गया था। इस दौरान अनुयायियों ने विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण भी किया। इस मौके पर माता विद्यावती, सुख सागर, नागलोक, नागपाल, धर्म सागर, सुख सागर, नाग ज्योति आदि मौजूद रहे।