इकौना। बच्चों की शिक्षा को लेकर मेरे पति बहुत फिक्रमंद थे। उनका सपना था कि तीनों बच्चे पढ़-लिखकर अफसर बनें। बच्चों को वह दिल्ली में उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे। उन्होंने बेटे हिमांशु का दाखिला भी वहीं के एक स्कूल में करवा दिया था, लेकिन अपना सपना अधूरा छोड़ कर चले गए।
अब बच्चों का पालन-पोषण और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। बिलखते हुए ये बातें दिल्ली बम धमाके में जान गंवाने वाले दिनेश मिश्रा की पत्नी रीना देवी ने बताईं।
रीना देवी ने बताया कि लगभग 10 साल पहले उनका विवाह हुआ था। दिनेश बहुत ही सरल स्वभाव के थे और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का सपना संजोए थे, ताकि बच्चे अफसर बन सकें। उनके तीन बच्चे बेटा हिमांशु (8), बेटी बिट्टा (7) और सृष्टि (4) हैं। बेटियों के छोटा होने से पति उन्हें दिल्ली लेकर नहीं गए थे।
हिमांशु का दाखिला दिल्ली के एक स्कूल में करवा दिया था और अगले साल बिट्टा को भी ले जाने की तैयारी में थे, लेकिन उनका ख्वाब अधूरा रह गया।
दिल्ली से शव लेकर निकले भाई व रिश्तेदार
पोस्टमार्टम होने के बाद दिनेश मिश्रा का शव परिजनाें को सौंप दिया गया था। परिजनों के मुताबिक सुबह लगभग 11 बजे शव दिया गया, एंबुलेंस से शव लेकर घर के लिए निकल लिए हैं। रात तक गांव पहुंचने की उम्मीद है।
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डीएम ने फोन पर बंधाया परिजनों को ढाढ़स
मंगलवार को डीएम अश्विनी कुमार पांडेय ने दिनेश के परिजनों से फोन पर बात कर परिजनों को ढाढ़स बंधाया। वहीं, एसडीएम इकौना पियूष जायसवाल ने घर जाकर पीड़ित परिवार का हाल जाना।
डीएम ने कहा कि पीड़ित परिवार की हर संभव मदद के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तत्पर है। बताया कि दिनेश दिल्ली के चावड़ी बाजार में प्रिंटिंग प्रेस में काम करते थे। उनके बड़े भाई व अन्य परिजन शव लेकर दिल्ली से श्रावस्ती के लिए रवाना हो चुके हैं। देर शाम पहुंचने की संभावना है।
उधर, दिनेश के पिता भूरे मिश्र ने बताया की उनके तीन छोटे-छोटे पोता-पोती अनाथ हो गए। परिवार का एक सहारा छिन गया।