जरवलरोड। लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। सरयू नदी पर स्थित संजय सेतु (घाघरा घाट पुल) का मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है। शनिवार दोपहर 12 बजे से इस पर वाहनों का आवागमन फिर शुरू हो जाएगा। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी पुल का अंतिम निरीक्षण एवं उद्घाटन करेंगे, जिसके बाद यातायात बहाल कर दिया जाएगा।
करीब डेढ़ माह से पुल पर मरम्मत कार्य चलने के कारण यातायात प्रतिबंधित था। इस दौरान प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थायी पीपा पुल के जरिये आवागमन की व्यवस्था की थी। हालांकि भारी वाहनों और लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त दूरी और समय खर्च करना पड़ा। पुल बंद रहने से स्थानीय व्यापार, माल ढुलाई और दैनिक आवागमन भी प्रभावित रहा।
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अवर अभियंता अनंत राम मौर्य ने बताया कि पुल के सभी तकनीकी और संरचनात्मक कार्य पूरे कर लिए गए हैं। सुरक्षा मानकों की जांच भी पूरी हो चुकी है। थानाध्यक्ष संतोष सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद दोपहर 12 बजे से पुल पर यातायात शुरू करा दिया जाएगा।
संजय सेतु के दोबारा खुलने की खबर से क्षेत्र के व्यापारियों, वाहन चालकों और आम लोगों में उत्साह है। लोगों का मानना है कि यातायात बहाल होने से लखनऊ-बहराइच मार्ग पर फिर से सामान्य स्थिति लौट आएगी और यात्रा पहले की तरह सुगम हो जाएगी।
अवर अभियंता अनंत राम मौर्य ने बताया कि संजय सेतु अब पूरी तरह तैयार है। शनिवार दोपहर प्रशासन की अंतिम स्वीकृति के बाद पुल पर वाहन फर्राटा भरेंगे। पुल खुलने से हजारों दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पुल की मरम्मत पर खर्च हुए 2.5 करोड़ रुपये
संजय सेतु की मरम्मत के लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसके अंतर्गत सेतु के जॉइंट्स की मरम्मत, अप्रोच रोड की खोदाई, डामरीकरण तथा अन्य आवश्यक सुधार कार्य किए गए। मरम्मत कार्य के दौरान पुल की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी गई, ताकि यातायात सुचारु और सुरक्षित रूप से संचालित हो सके।
6.18 करोड़ की लागत से बना था अस्थायी पीपा पुल
पुल की मरम्मत अवधि के दौरान लगभग 6.18 करोड़ रुपये की लागत से अस्थायी पीपा पुल बनाया गया था। इसी के माध्यम से करीब डेढ़ माह तक यातायात संचालित किया गया। इस व्यवस्था से आम जनता को राहत तो मिली, लेकिन भारी वाहनों और लंबी दूरी के यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।