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तीसरी बार अनारक्षित वर्ग को मिलेगा अध्यक्ष पद

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श्रावस्ती। जिला पंचायत अध्यक्ष के आरक्षण की सूची जारी हो गई है। जिले को अनारक्षित वर्ग में रखा गया है। इससे पहले भी दो चक्र में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनारक्षित वर्ग के लिए सुनिश्चित था। इसमें से 2011 से 16 तक अनारक्षित व 2016 से 21 तक सामान्य महिला के लिए सुरक्षित किया गया था। यह बात और है कि सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भी इस पद पर पिछड़ी वर्ग महिला के रूप में साक्षी कैराती काबिज रहीं। लेकिन मौजूदा समय में जिले के अनारक्षित वर्ग में होने के बाद राजनैतिक उहापोह की स्थिति बढ़ गई है। जहां कुछ सत्ताधारी माननीय इस कुर्सी पर काबिज होने के लिए अपनों को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्षों का यह रहा कार्यकाल
श्रावस्ती जनपद का गठन वर्ष 1997 में हुआ था। इसी के बाद वर्ष 1998 से लेकर 2001 तक प्रथम जिला पंचायत का गठन हुआ। जिसमें पीतांबरी देवी अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुईं। इसी के बाद 2001 से लेकर 2006 तक अध्यक्ष पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित रहा। इस दौरान हाशिमा बेगम अध्यक्ष के रूप में चुनी गई। 2006 से लेकर 2011 तक अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस समय रामअधार सोनकर को अध्यक्ष बनने का मौका मिला। जबकि 2011 से लेकर 2016 तक का कार्यकाल अनारक्षित रहा। इस दौरान पहले रुकमणि देवी अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। लेकिन जल्द ही इनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आने के कारण शेष कार्यकाल के लिए रमन सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी मिली। लेकिन 2016 में यह सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित कर दी गई थी। लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव के चलते सपा से भिनगा विधायक रही इंद्राणी वर्मा की पुत्री साक्षी वर्मा को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी निर्विरोध ही मिल गई।
भाजपा के खाते में एक ही बार गई अध्यक्ष की कुर्सी
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा के खाते में केवल 1998 से लेकर 2001 तक रही। इसी के बाद हाशिमा बेगम व राम अधार सोनकर सपा के समर्थन से इस कुर्सी पर काबिज हुए। वहीं 2011 में बसपा के समर्थन से रुकमणि देवी को यह कुर्सी मिली तो लेकिन बीच में ही सरकार का कार्यकाल बदलते ही सपा का शासन जैसे ही आया वैसे ही रमन सिंह इस कुर्सी पर काबिज हो गए। यही स्थिति 2016 से लेकर 2021 तक के कार्यकाल में रही। सपा का कार्यकाल बीतते ही भाजपा सरकार बनी। उसके बाद दो बार इस पद के लिए अविश्वास प्रस्ताव आया। इसी दौरान चार माह के लिए अध्यक्ष का वित्तीय अधिकार रोकते हुए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई। जिसमें विभा सिंह, मोलहू राजभर व लीना राव ने जिला पंचायत अध्यक्ष के दायित्वों का निर्वहन किया।
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