सुल्तानपुर। गवाही देने आए सीबीसीआईडी के पूर्व अभियोजन अधिकारी सुरेश चंद्र अग्निहोत्री की 39 वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में एडीजे प्रथम संध्या चौधरी की अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बर्खास्त दरोगा सहित दो आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।
कोतवाली देहात थाने के नकराही गांव के तत्कालीन प्रधान इसरार अहमद ने 28 फरवरी 1987 की घटना का जिक्र करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराया था। आरोप के मुताबिक उनके गांव स्थित कुएं में एक व्यक्ति की हत्या कर शव मिला था। शव की शिनाख्त शाहजंहापुर के रहने वाले पूर्व सीबीसीआईडी के अधिकारी सुरेश चंद्र अग्निहोत्री के रूप में हुई थी। पूर्व सीबीसीआईडी अभियोजन अधिकारी सुरेश चंद्र अग्निहोत्री गोसाईगंज थाने से जुड़े करीब डेढ़ क्विंटल मादक पदार्थ बरामदगी के मामले में दरोगा इम्तियाज अहमद के साथ सीजेएम कोर्ट में गवाही देने आए थे, फिलहाल उस दिन गवाही नहीं हो सकी थी।
इसके चलते वह गोसाईगंज थाने में रुक गए थे। आरोप के मुताबिक इसी बीच आरोपियों ने साजिश रचकर उनकी हत्या कर नकराही गांव के कुएं में उनका शव फेंक दिया था। इस मामले में सुल्तानपुर जिले के चर्चित व्यापारी आरोपी संतलाल जायसवाल, लखनऊ जिले के मड़ियांव थाने के आसमा निवासी दरोगा इम्तियाज अहमद, बाराबंकी जिले के नई बस्ती निवासी मो. हफीज व गुलाम मुस्तफा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
आरोपी संतलाल जायसवाल को उन्मोचित कर दिया गया था। ट्रायल के दौरान संतलाल जायसवाल व गुलाम मुस्तफा की मृत्यु हो गई। शेष के खिलाफ ट्रायल चल रहा था। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को बड़ी राहत दी है।