जमुनहा (श्रावस्ती)। जिले के जंगल में भले ही कुल्हाड़ी लेकर मानव का प्रवेश वर्जित हो, लेकिन लकड़हारों व चरवाहों का बेखौफ आना जाना जारी है। जिनके द्वारा बेशकीमती प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों को काटा जा रहा है। जिसकी जलौनी बना कर उनके द्वारा आसपास के गांव व बाजारों में बेचा जा रहा है।
जमुनहा क्षेत्र के ककरदरी दक्षिणी व परसा डेहरिया के निकट जंगल मे लकड़हारे साल सागौन व खैर सहित अन्य प्रजाति के पेड़ो को बेखौफ काटा जा रहा है। जिसका बाद में उनके द्वारा छोटे छोटे टुकड़ों व उसे चीर कर जलौनी बनाई जा रही है। जिसे लकड़हारों द्वारा आसपास के गांव व बाजार में बेचा जा रहा है। लकड़हारे इन लकड़ियों को राप्ती बैराज पर बने वन बैरियर से होकर ले जाते हैं, जबकि यहां मौजूद वन कर्मियों द्वारा उन्हें टोकना भी मुनासिब नहीं समझा जाता।
जानकारों की माने तो इसके एवज में वन बैरियर पर तैनात कर्मियों द्वारा लकड़हारों से सुविधा शुल्क भी वसूल किया जाता है। वन कर्मियों की साठगांठ से लकड़हारे प्रतिबंधित व बेशकीमती पेड़ों को रात में काटकर गिरा देते हैं।
बाद में उसको फाड़ कर जमुनहा बाजार, जमुनहा बस स्टैंड, कानीबोझी, वीरगंज बाजार, मल्हीपुर, साईगांव बाजार, मालही चौराहा, चिंता चौराहा, परसा डेहरिया, राप्ती बैराज स्थित सरयू नहर, भंगहा बाजार, नथुनिया मोड़, बोहरवा बाजार, बदला चौराहा बाजार , गिरन्ट बाजार, मिर्जापुर, इमलिया चौराहा, हरबंशपुर चौराहा, नासिरगंज बाजार आदि स्थानों के बाजारों में बेच देते हैं।
ऐसा ही कुछ जमुनहा में देखने को मिला। जब लकड़हारे कई साइकिल लकड़ी जलौनी के नाम पर साल की लकड़ी काट कर ले जाते दिखे। डीएफओ एपी यादव का कहना है कि मामले की जानकारी हुई है। कर्मचारियों को भेजकर जांच कराई जाएगी।