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थाने में पहले भी होक चुकी हैं कई मौतें

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श्रावस्ती। पुलिस अभिरक्षा में गिलौला थाने में युवक की मौत का मामला जिले में पहला नहीं है। इससे पहले भी पुलिस अभिरक्षा में कई लोगों की मौत हो चुकी हैं। इसमें थाना प्रभारियों को जेल की हवा भी खानी पड़ी। इन मुकदमों में अभी तक न्यायालय से कोई फैसला नहीं आया है। इसका कारण इनका कोर्ट में विचाराधीन होना है।
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गिलौला थाने में छेड़छाड़ के एक आरोपी को पुलिस उठा लाई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उसे सात दिनों तक अनाधिकृत रूप से थाने में रखकर प्रताड़ित किया गया। उससे पैसे की मांग भी की गई। इसी बीच आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में थाने के शौचालय में लाश मिली। मामले में पुलिस ने आरोपी की ओर से आत्महत्या करने की बात कही। इस खबर के बाद आमलोग सड़क पर उतर आए।
भीड़ की घंटों मशक्कत के बाद पुलिस कर्मियों पर हुई कार्रवाई से मामला शांत हुआ। वहीं पुलिस अभिरक्षा में हुई इस मौत से कानून व्यवस्था पर कई प्रश्न उठे। पुलिस अभिरक्षा में मौत का जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई लोगों की मौत हो चुकी है। कुछ वर्ष पूर्व सोनवा थाने में पुलिस एक वृद्ध को मामूली विवाद में ले आई थी। उसे थाने में इतना प्रताड़ित किया गया कि उसकी लाकअप में ही मौत हो गई।
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इस मामले में तात्कालिक थाना प्रभारी को निलंबित कर उनके विरुद्ध केस दर्ज किया गया था। उन्हें काफी दिनों तक जेल में रहना पड़ा। अभी भी यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी प्रकार गिलौला थाने में ही वर्ष 2007 में सिपाही की पिटाई से अधेड़ की मौत हो गई थी। आरोप था कि रानीपुरकाजी गांव के मजरा पेडऱही पुरवा निवासी काली प्रसाद मिश्रा थाने के पास पान की दुकान करता था।
उसका क्षेत्र के ही नाऊपुरवा निवासी रामनरेश व मेड़ई मौर्य के बीच जमीनी विवाद चल रहा था। जिसमें मध्यस्थता करने पर हल्के में तैनात सिपाही को कुछ लेन देन करा दिया गया। इससे नाराज होकर अन्य सिपाही सिद्धेश्वर यादव व दीनानाथ मौर्या ने काली प्रसाद की जमकर पिटाई कर दी। जिससे काली प्रसाद की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
इस मामले में दोनों सिपाहियों के विरुद्ध मामला पंजीकृत किया गया था। कई वर्ष बाद पीड़ित परिवार ने मामले में समझौता कर लिया था। ऐसे ही भिनगा कोतवाली में कुछ वर्ष पूर्व पारिवारिक रंजिश में पुलिस दो लोगों को पकड़ कर लाई थी। दोनों को पुलिस ने कोतवाली कैंप में लगे घास को साफ करने के लिए लगाया गया था। इसी बीच इसमें से एक आरोपी ने दूसरे आरोपी पर फावड़े से हमला कर उसकी गर्दन काट दी थी।
पुलिस ने लाश को बाहर निकाल कर उसकी हत्या दूसरी जगह दिखा कर मामला पंजीकृत किया था। आम लोगों की जुबां पर यह मामला आज भी ताजा है। पुलिस अभिरक्षा में मौत के साथ ही गंभीर रूप से पिटाई के कई मामले हैं। जहां पुलिस ने धन उगाही व किसी व्यक्ति का पक्ष लेने के लिए दूसरे को मरणासन्न कर दिया। ऐसा ही मामला विगत माह मल्हीपुर थाने में आया था।
जहां जमीन के विवाद में पुलिस ने एक व्यक्ति का पक्ष लेकर एक बुजुर्ग को इतना पीटा कि वह अस्पताल पहुंच गया। इस मामले में एसपी ने तात्कालिक थाना प्रभारी बृजेश द्विवेदी को निलंबित कर दिया था। यह मामला भी जांच प्रक्रिया में है। यह वह मामले है जिन पर उच्चाधिकारियों ने कार्रवाई की। वहीं कई ऐसे भी मामले हैं जो पुलिस के डर से सामने नहीं आए।
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