गिलौला (श्रावस्ती)। क्षेत्र में स्थापित गोशाला की स्थिति बदहाल है। यहां गोवंशों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को गोंड़ारी में मरे दो गोवंशों को मजदूरों के सहयोग से नहर में फेंकने के लिए ले जाया जा रहा था। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने मजदूरों को बंधक बना लिया। सूचना पर पहुंची गिलौला पुलिस ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर मामला शांत कराया। बाद में गोवंशों को गोशाला परिसर में ही दफन करवाया गया।
गिलौला क्षेत्र के गोंड़ारी गांव में बनी गोशाला में गोवंशो के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। यहां चिलचिलाती धूप व खुले आसमान के नीचे बंधी 80 गायों के खाने की व्यवस्था नहीं है। इससे यहां गाय बीमार होकर दम तोड़ रही हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहां अक्सर गोवंशों की मौत हो रही है। जिन्हें ठेले में लादकर सड़क के किनारे फेंक दिया जाता है।
इससे उठने वाली दुर्गंध से उस ओर से निकलना भी दुश्वार हो गया है। शुक्रवार को एसडीएम इकौना व खंड विकास अधिकारी गिलौला ने गोशाला का निरीक्षण किया था। इस दौरान दो गाय मृत मिली थी, जबकि एक गाय कीचड़ में फंसी दिखी थी। उसे निकालकर किसी तरह बाहर किया गया।
मृत गायों को देर शाम कुछ मजदूर ठेले पर लादकर पड़ोसी मलावां गांव के पास नहर में फेंकने के लिए ले जा रहे थे। जिन्हें देखकर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों ने मजदूरों को बंधक बना लिया। प्रधान प्रतिनिधि की सूचना पर पहुंची गिलौला पुलिस ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया। बाद में मृत गायों को वापस लाकर गोशाला में दफन किया गया।
इस बारे में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दर्शनलाल यादव ने बताया कि मजदूरों को मजदूरी न मिलने के कारण गायों के देखभाल की व्यवस्था नहीं हो पाती। वहीं खंड विकास अधिकारी आरपी शर्मा ने गायों के मरने का कारण अधिक धूप और बरसात होना बताया।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के लिए अलग से कोई भी मजदूरी देने की व्यवस्था नहीं है। प्रति गाय 30 रुपये चारे के लिए आता है। उसी में सब कुछ किया जाता है। मजदूरों के साथ हुई अभद्रता की हमें कोई जानकारी नहीं है।