रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग।
कटरा। इकौना स्थित रामलीला मैदान में बुधवार को रघुपति पांडेय की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु की महिमा का बखान करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार शुक्ला ने कहा, आदि काल से गुरु और शिष्य की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के बाद गुरु दत्तात्रेय को सबसे बड़ा गुरु माना गया है। देवताओं के पहले गुरु अंगिरा ऋषि थे। इसके बाद उनके पुत्र बृहस्पति और फिर भारद्वाज गुरु बने। प्रत्येक देवता किसी न किसी के गुरु रहे हैं। वहीं, शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे और उनसे पहले महर्षि भृगु असुरों के गुरु माने जाते थे।
महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य एकलव्य, कौरवों और पांडवों के गुरु थे, जबकि परशुराम कर्ण और भीष्म पितामह के गुरु रहे। वेद व्यास, गर्ग मुनि, सांदीपनि और दुर्वासा जैसे ऋषि भी गुरु परंपरा के प्रमुख उदाहरण हैं। डॉ. शुक्ला ने कहा, चाणक्य के गुरु उनके पिता चणक थे और सम्राट चंद्रगुप्त के गुरु आचार्य चाणक्य थे। कार्यक्रम में देवराज, नवनीत, राम प्रकाश, प्रमोद पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।