कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को म्यांमार से आए अनुयायियों के 30 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से आनंद बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि जेतवन विहार के ठीक सामने आनंद बोधि वृक्ष के दर्शन होते हैं। यह आनंद बोधि वृक्ष भगवान बुद्ध के समय का है। इसका उल्लेख पजिवलिय नामक सिंहली ग्रंथ में मिलता है।
बताया कि महात्मा बुद्ध केवल वर्षा ऋतु में जेतवन महाविहार में ठहरते थे। शेष समय वह भ्रमण कर उपदेश देते थे। अनुयायियों ने उनसे अपनी अनुपस्थिति में उपासना के लिए एक स्थायी चिह्न देने की प्रार्थना की थी। बुद्ध ने अपने प्रधान शिष्य आनंद को श्रावस्ती में बोधि वृक्ष की शाखा लगाने की आज्ञा दी।
देव शक्ति से संपन्न महामोगलायन वायु मार्ग से यह शाखा लाए थे। राजा प्रसेनजित ने यह कहकर रोपण से इन्कार कर दिया था कि राजा की शक्ति की स्थिरता निश्चित नहीं होती। तब यह कार्य अनाथपिंडक द्वारा किया गया। महात्मा बुद्ध ने इसके नीचे पूरी एक रात ध्यानावस्था में व्यतीत कर इसकी महत्ता और पवित्रता को बढ़ाया था।