इकौना। सेमगढ़ा चौराहे से गोविंदपुर को जोड़ने वाले मार्ग पर निर्माणाधीन पुल के बगल आवागमन सुचारु रखने के लिए बनाया गया अस्थायी बाईपास बीते कई दिनों से राप्ती के पानी में जलमग्न है। बाईपास पर पानी का तेज बहाव होने से 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया है। छोटे वाहनों का निकलना मुश्किल है, जबकि कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पैदल और बाइक से रास्ता पार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था कराने की मांग की है।
शासन की ओर से इकौना तहसील क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए गोविंदपुर मोड़ से सेमगढ़ा मार्ग पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है। पुल निर्माण के दौरान आवागमन बाधित न हो, इसके लिए अस्थायी बाईपास बनाया गया था। हालांकि, बीते कई दिनों से राप्ती का पानी बाईपास पर बह रहा है। इससे सेमगढ़ा, जानकी नगर, सौरूपुर, रामपुर कटेल, जंगरावल गढ़ी, शिशुवारा, भासभरिया पुरैना समेत 20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
बाईपास के जलमग्न होने के कारण ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन के लिए करीब 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। लोग गिलौला या लालपुर खदरा होकर अपने घरों तक पहुंच रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ रही है। वहीं, कुछ ग्रामीण मजबूरी में पानी के बीच से पैदल और बाइक लेकर गुजर रहे हैं। इससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किल
बाईपास पर राप्ती का पानी बहने से सबसे अधिक परेशानी साइकिल से स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है। स्कूल बसों का आवागमन तो किसी तरह हो जा रहा है, लेकिन साइकिल सवार बच्चों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सौरूपुर निवासी हंसराम तिवारी ने बताया कि मार्ग पर घुटने से अधिक पानी बह रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों को पैदल गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस मार्ग से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक लोग आवागमन करते थे। ग्रामीण कासिम ने कहा कि पानी के कारण पैदल गुजरना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन को बाईपास मार्ग को ऊंचा कराकर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को राहत मिल सके।
सेमगढ़ा चौराहा-गोविंदपुर मार्ग पर बने अस्थाई बाईपास पर बहते पानी के बीच जान जोखिम में डालकर गु
सेमगढ़ा चौराहा-गोविंदपुर मार्ग पर बने अस्थाई बाईपास पर बहते पानी के बीच जान जोखिम में डालकर गु