श्रावस्ती। जिले की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर अन्य जिलों की तुलना में अधिक है, जो चिंता का विषय है। इसे रोके बिना स्वस्थ समाज की परिकल्पना पूरी नहीं की जा सकती। इसलिए मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए विशेष प्रयास की जरूरत के साथ ही कारगर कदम उठाए जाएं, जिससे जिले में किसी भी गर्भधात्री महिला व नवजात की मौत न होने पाए।
यह बातें शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी यशु रुस्तगी ने कहीं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया से लेकर उनके अधीनस्थ प्रभारी चिकित्साधिकारियों के साथ ही स्वास्थ्य निरीक्षक, एएनएम, आशा बहू, आशा संगनियों को अब विशेष ध्यान रखकर जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा, जिससे जिले की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षा कर मृत्यु के कारणों का विश्लेषण भी किया जाए, जिससे भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। समीक्षा के दौरान यह पता चला कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर व इकौना में पुरुष नसबंदी लक्ष्य के सापेक्ष बहुत कम है। इस पर उन्होंने संबंधित को ढंग से कार्य करने की नसीहत देते हुए परिवार नियोजन के साधनों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि एएनएम और आशाओं की ओर से गांवों में ढंग से परिवार नियोजन की न तो जानकारी दी जा रही है और न ही उन्हें परिवार नियोजन अपनाने की विधि बताई जा रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया कि वह एएनएम और आशाओं के माध्यम से परिवार नियोजन के बारे में अपने तैनाती स्थलों के गांवों में जानकारी दें। साथ ही लोगों को बताएं कि परिवार बड़ा होने पर उनके भरण पोषण में दिक्कत होती है। एनआरसी की समीक्षा के दौरान अति कुपोषित बच्चों की उपस्थिति कम होने पर सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
इस दौरान डीएम ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना एवं हाई रिस्क गर्भवती की पहचान सहित स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित अन्य कार्यक्रमों की समीक्षा कर जन-जन को स्वस्थ रखने का निर्देश दिया। इस मौके पर सीएमओ डॉ. एपी भार्गव, सीडीओ अवनीश राय, डीपीओ आशा सिंह, एसीएमओ डॉ. मुकेश मातन हेलिया, वित्त एवं लेखाधिकारी हसीब असगर, राकेश त्रिपाठी, डब्ल्यूएचओ की एसएमओ डा. प्रिया बंसल आदि मौजूद रहे।