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कक्षा दो के छात्र नहीं लिख पाते अपना नाम

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श्रावस्ती में बच्चों द्वारा ड्रेस लेने के लिए लगाए गए अंगूठे। - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। जिले के परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर नहीं सुधर रहा है। सरकार जहां बच्चों का दाखिला परिषदीय स्कूलों में कराने पर जोर दे रही है वहीं इन विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। जिले के अधिकांश परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को अपना नाम तक नहीं लिखना आता है। इसका खुलासा समय समय पर अधिकारियों की ओर से हो रहे निरीक्षण में सामने आता रहता है।
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शासन की ओर से चलाए जा रहे सर्व शिक्षा अभियान को बच्चे और शिक्षक अंगूठा दिखा रहे हैं। इसका उदाहरण बच्चों को ड्रेस, जूता मोजा व पाठ्य पुस्तक वितरण के रजिस्टर में साफ देखा जा रहा है। इसमें कक्षा दो के छात्रों ने अपना नाम लिखने के बजाए अंगूठा लगाया है। इस पर शिक्षकों ने भी बच्चों से नाम लिखाने का प्रयास नहीं किया है। यही स्थिति जिले के जूनियर तक के कई छात्रों की भी है।
जिले के परिषदीय विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों की शैक्षिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। कई विद्यालयों में बच्चों को हिंदी की वर्णमाला की पहचान तक नहीं है। कक्षा पांच तक शायद ही कोई बच्चा मिले जो सौ तक की गिनती या फिर 10 तक पहाड़ा जानता हो। हालात इससे भी ज्यादा जिले में खराब हैं। बच्चे अपना नाम तक नहीं लिख पा रहे हैं।
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इसका खुलासा गुरुवार को प्राथमिक विद्यालय चितईपुर में हुआ। यहां छात्रा संजना पाल, मिलाला, कविता के साथ छात्र अंकित व अर्जुन ककहरा का क भी नहीं पहचान पाए। यही नहीं निशुल्क ड्रेस व पाठ्य पुस्तक वितरण के रजिस्टर को देखने के बाद स्थिति और भी चौकाने वाली नजर आई।
कक्षा दो के नब्बे फीसदी छात्रों ने विद्यालय से ड्रेस प्राप्त करने के लिए अपना नाम लिखने के बजाए अंगूठा लगाया हुआ था। यही नहीं स्कूल में मौके पर बच्चे किताब खोल कर पढ़ने के बजाए आपस में बात कर रहे थे। जबकि बच्चों की उपस्थिति नामांकन के सापेक्ष ठीकठाक थी। प्राथमिक स्कूल में कुल 179 बच्चे थे। इसमें 124 बच्चे उपस्थिति मिले, लेकिन उन्हें पढ़ाने के नाम पर मात्र एक टीचर की ही तैनाती है।
सीडीओ अवनीश राय ने कहा कि परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक स्थिति खराब है, इसकी जानकारी है। इसीलिए स्कूलों में लगातार छापेमारी करके व्यवस्था सुधारी जा रही है। कक्षा दो का छात्र अंगूठा लगा रहा है, यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। इसकी जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही स्कूल से हटाए गए शिक्षकों के बारे में भी जांच कराई जाएगी।
जो ककहरा न सिखा सके उन्हें अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में मिली तैनाती
जिले में सर्व शिक्षा अभियान की कमर अधिकारी ही तोड़ रहे हैं। इसका उदाहरण भी इसी स्कूल में देखने को मिला। विगत वर्ष प्राथमिक विद्यालय चितईपुर में चार शिक्षिकाएं तैनात थी। इन शिक्षिकाओं की उपस्थिति के बाद भी बच्चे न तो हिंदी की वर्णमाला सीख पाए और न ही अंग्रेजी की एबीसीडी। इनमें से तीन शिक्षिकाओं मालती राव, शुभद्रा यादव व शोभना चतुर्वेदी को नए शिक्षण सत्र में इसी स्कूल के बगल गोठवा में बनाए गए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में शिक्षण कार्य के लिए तैनात कर दिया गया। जानकारी के अनुसार मालती राव ने हाईस्कूल तक ही अंग्रेजी की पढ़ाई की है। इन्हीं शिक्षिकाओं के शिक्षण कार्य का ही नतीजा है कि कक्षा दो के छात्र अंगूठा लगाकर ड्रैस व निशुल्क पाठ्य पुस्तक प्राप्त कर रहे हैं।
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