जेतवन परिसर में मोमबत्ती जलाकर पूजा करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 30 सदस्यीय दल से गुलजार रही। अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में जेतवन परिसर में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा में मौजूद अनुयायियों को संबोधित करते हुए भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि भगवान बुद्ध जेतवन विहार में रह रहे थे, उसी दौरान भिक्षु चक्षुपाल उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने भगवान बुद्ध से उनकी दिनचर्या, व्यवहार और गुणों के संबंध में चर्चा की। भिक्षु चक्षुपाल अंधे थे।
एक दिन विहार के कुछ भिक्षुओं ने भिक्षु चक्षुपाल की कुटी के बाहर कुछ कीड़ों को मरा पड़ा देखा। इस पर सभी ने चक्षुपाल की निंदा करनी शुरू कर दी कि चक्षुपाल ने जीवित प्राणियों की हत्या की है। जानकारी होने पर भगवान बुद्ध ने निंदा कर रहे उन भिक्षुओं को बुलाया और उनसे कहा कि अगर तुमने उन्हें कीड़ों को मारते हुए नहीं देखा, तो आलोचना सही नहीं है।
चक्षुपाल के अंधे होने पर भगवान बुद्ध ने बताया कि पूर्व जन्म में वह एक चिकित्सक थे और एक अंधी स्त्री की आंखें सही करने का वादा किया था। बौद्ध सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।